बीते कुछ ही महीनों के दौरान सबसे मजेदार वीडियो वाले प्लेटफॉर्म के रूप में पहचान बना चुका मोबाइल वीडियो एप टिकटॉक इन दिनों अपने अश्लील कंटेंट की वजह से विवादों में हैं. अप्रैल की शुरुआत में मद्रास हाई कोर्ट ने इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद उसने यह प्रतिबंध हटा लिया. लेकिन कोर्ट ने यह रोक इस शर्त पर हटाई है कि चीनी कंपनी बाइटडांस द्वारा निर्मित इस शॉर्ट वीडियो एप्लिकेशन पर अब से अश्लील या पोर्नोग्राफिक वीडियो नहीं डाले जाएंगे. कोर्ट के इस नए निर्देश के बाद जानकारों में बहस छिड़ी है कि क्या टिकटॉक पर अश्लील सामग्री अपलोड होने से रोकी जा सकती है और क्या केवल टिकटॉक को रोकने से अश्लीलता का कारोबार रुक जाएगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन पर उपलब्ध कई लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्मों पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के मामले में टिकटॉक सबसे आगे है. अखबार ने कुछ उदाहरणों से बताया है कि इस समय टिकटॉक पर किस तरह के लाइव वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. मसलन, इस मोबाइल एप पर एक व्यक्ति अन्य यूजर्स से कहता है कि अगर वे उसे अपनी सोती पत्नी को प्यार करते देखना चाहते हैं, तो बदले में उसे ‘तोहफे’ देने होंगे. वहीं खुद को बैले डांसर कहने वाली एक किशोरी इन्हीं तोहफों के लिए इस एप पर न के बराबर कपड़े पहन कर डांस करती है. एक और कम उम्र की किशोरी मोबाइल कैमरा सामने रख कर फिल्मी ‘आइटम’ गानों पर नाचते हुए बेहद कम कपड़ों में दिखती है.

लाइक्स और पैसे के चक्कर में लांघी जा रही सीमा

इस रिपोर्ट में शॉर्ट वीडियो एप्स पर पिछले छह महीने से काम कर रहीं शादमा शेख बताती हैं कि इन प्लेटफॉर्मों (जैसे बीगो लाइव, क्लिप, लाइक, क्वाई, टिकटॉक) पर अश्लील सामग्री मिलना बहुत आम बात है. इन्हें बनाकर अपलोड करने वालों (क्रिएटर या ब्रॉडकास्टर) को ज्यादा से ज्यादा लाइक्स मिलने पर अलग-अलग ‘गिफ्ट’ मिलते हैं. जैसे बीगो लाइव पर दर्शक ‘वर्चुअल डायमंड’ खरीदते हैं. वे एप पर कोई अश्लील वीडियो देखने के लिए उसके ब्रॉडकास्टर (जो कोई भी यूजर बन सकता है) को ये वर्चुअल डायमंड बतौर भुगतान देते हैं. ब्रॉडकास्टर इस वर्चुअल पेमेंट को कैश करा सकता है. यानी पैसे का खेल इस फूहड़ता को बढ़ावा दे रहा है.

यह बड़ा कारण है कि लालच में ब्रॉडकास्टर अक्सर सीमा लांघ जाते हैं. उदाहरण के लिए, एक महिला लाइव ब्रॉडकास्टिंग के समय अपने गले के निचले हिस्से का प्रदर्शन करती है. फिर वह उसे देख रहे यूजर्स से कहती है कि जो भी उसके गिफ्ट खरीदेगा, उससे वह 30 मिनट तक बात करेगी और शरीर के ऊपरी हिस्से का कपड़ा उतार देगी.

‘यूजर-जेनरेटिड प्लेटफॉर्म’ का बहाना

इस तरह का कंटेंट परोसने वाले प्लेटफॉर्म नाम के लिए नियमों का पालन करते हैं. सोशल मीडिया के दौर में इन नियमों को ‘कम्युनिटी स्टैंडर्ड’ का नाम दिया गया है जो अक्सर कमजोर होते हैं. अगर कोई व्यक्ति इनके अश्लील कंटेंट की ओर समाज का ध्यान आकर्षित करता है तो संबंधित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर यह बहाना बना दिया जाता है कि चूंकि यह प्लेटफॉर्म यूजर-जैनरेटिड है, इसलिए इस पर दिखाई गई सामग्री खुद यूजर ने डाली थी, जिसे आपत्ति जताए जाने के बाद हटा लिया गया. इस तरह इन्हें बिना किसी पेनल्टी के लगातार गैरकानूनी कंटेंट डालते रहने की छूट सी मिलती रहती है.

हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि इस यूजर-जैनरेटिड वाले बहाने को नहीं माना जा सकता. तकनीक से जुड़े मामलों के वकील सलमान वारिस कहते हैं, ‘ये प्लेटफॉर्म टेलीकॉम लाइसेंस और आईटी एक्स की धारा 79 के तहत आते हैं इसलिए सर्विस प्रोवाइडर यह बहाना नहीं बना सकता. कानून का पालन सुनिश्चित करने की पहली जिम्मेदारी उसी की है.’ वहीं, साइबर पीस फाउंडेशन के ट्रेनिंग व पॉलिसी मैनेजर नीतीश चंदन कहते हैं कि इस मामले में सेल्फ-रेगुलेशन कोई विकल्प नहीं है. उनके मुताबिक, ‘ये प्लेटफॉर्म स्वनियमन के तहत चलते हैं जो अब तक नाकाम रहा है. जब हमारे सामने नग्नता की चुनौती हो तो प्लेटफॉर्मों के पास तकनीकी सिस्टम होना चाहिए ताकि पर्याप्त संख्या में ऐसे वीडियो की पहचान हो सके. अगर कोई वीडियो उस सिस्टम के अनुरूप नहीं है तो उसे हटा दिया जाना चाहिए और यूजर अकाउंट सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए.’

यूट्यूब-इंस्टाग्राम पर भी अश्लीलता को बढ़ावा

फनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नाम पर ‘पोर्न’ दिखाने की समस्या केवल टिकटॉक से जुड़ी नहीं है. यूट्यूब पर भी ‘बीगो लाइव इंडियन गर्ल’ या ‘टिकटॉक इंडियन गर्ल’ सर्च करके सैकड़ों अश्लील वीडियो मिल जाते हैं. ‘भाभी’ या ‘इंडियन वर्जिन’ सर्च करने पर तो और भी अश्लील क्लिप सामने आती हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस बारे में जब यूट्यूब से संपर्क किया तो उसने इस मसले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

वहीं फैक्टर डेली नाम की वेबसाइट की जनवरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में चाइल्ड पोर्न के कारोबार के प्रसार के लिए वॉट्सएप ग्रुप्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, इंस्टाग्राम को लेकर भी यह जानकारी सामने आई है कि पेटीएम के जरिये ऑनलाइन पेमेंट कर वहां (इंस्टाग्राम) अलग-अलग अश्लील सेवाएं दिए जाने का कारोबार चल रहा है. इकॉनॉमिक टाइम्स ने फरवरी में अपनी एक रिपोर्ट बताया था कि एक फोटो शेयरिंग एप्लिकेशन की मदद से तस्वीरों का इस्तेमाल कर अश्लील सामग्री को बढ़ावा देने का काम चल रहा था. अखबार ने जब इस बारे में इंस्टाग्राम से संपर्क किया तो उसने कहा कि वह मामले की जांच कर रहा है और उसने उन अकाउंटों को हटा दिया है जो सेक्स को लेकर उसकी नीति-नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.

कम्युनिटी स्टैंडर्ड नहीं, सरकारी नियमों की जरूरत

तमाम विवादों से पैदा हुए दबाव के चलते आखिरकार टिकटॉक ने कुछ सुरक्षा फीचर लाने की बात कही है. इसके साथ ही वह करीब 60 लाख वीडियो को भी हटाएगा जो उसके कम्युनिटी स्टैंडर्ड से नियमों का उल्लंघन करते हैं. साथ ही, प्लेटफॉर्म ने अनुचित कंटेंट को रोकने के लिए स्थानीय भाषाओं की मदद लेने का भी सुझाव दिया है. बाइटडांस की तरफ से एक सुधार यह भी सुझाया गया है कि अब से केवल 13 साल से अधिक उम्र के लोग ही टिकटॉक अकाउंट शुरू कर सकते हैं.

लेकिन यह काफी कमजोर उपाय है, क्योंकि अकाउंट शुरू करने के लिए केवल जन्मतिथि डालने की जरूरत है. 13 साल से कम उम्र का बच्चा आसानी से गलत तारीख डालकर एप चला सकता है. जानकार भी मानते हैं कि उम्र के आधार इस समस्या का निदान होना संभव नहीं है. उनके मुताबिक इससे लोगों को इन प्लेटफॉर्म पर आने से नहीं रोका जा सकता. इस बारे में एक विशेषज्ञ कहते हैं, ‘भारत में बीगो लाइव के इस्तेमाल के लिए उम्र की सीमा केवल 12 वर्ष और आईओएस एप स्टोर के लिए 17 साल है. हमें जरूरत है कि सरकार इस बारे में नियम तय करे कि किस उम्र के लोग इन एप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि बच्चे इनसे सुरक्षित रहें.’

टिकटॉक से जुड़ी हालिया रिपोर्टें इस दलील का समर्थन करती हैं. बीबीसी की एक जांच-पड़ताल बताती है कि शिकायत बावजूद यह प्लेटफॉर्म बच्चों को भेजे जा रहे सेक्शुअल मैसेज रोकने में नाकाम रहा है. इससे चिंतित बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों ने हाल में इस एप पर बैन लगा दिया. वहीं, अमेरिका में इस प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़ी जानकारी गैरकानूनी तरीके इकट्ठा करने के लिए 57 मिलियन डॉलर (398 करोड़ रुपये से ज्यादा) का जुर्माना भी लगाया गया था.