उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के ‘गांवों के कैटगरी’ वाले बयान की चुनाव आयोग ने निंदा की है. इस बारे में चुनाव आयोग ने भाजपा प्रत्याशी को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उनके उस बयान को आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए उन्हें भविष्य में ऐसे बयान न देने के लिए चेतावनी भी दी है. मेनका गांधी ने यह बयान इसी महीने की 14 तारीख को सुल्तानपर के सरकोड़ा गांव में दिया था.

तब एक वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था, ‘हम हर बार पीलीभीत संसदीय क्षेत्र में जीतते रहे हैं. इसलिए हमने वहां कुछ मानदंड बनाए हैं. कुछ गांवों में ज्यादा तो कुछ में दूसरे गांवों के मुकाबले कम काम किया जाता है.’ इसके साथ ही मेनका गांधी ने ऐसे गांवों की ‘ए, बी, सी और डी’ कैटगरी (श्रेणी) भी बताई थी. उन्होंने कहा था, ‘जिन गांवों में भाजपा को 80 फीसदी वोट मिलते हैं उसे ए और 60 प्रतिशत वोट वाले गांवों को बी श्रेणी में रखा जाता है. साथ ही 50 फीसदी वोट वाले गांव सी जबकि 50 फीसदी से कम वोट के गांव डी श्रेणी में शामिल किए जाते हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यह मतदाताओं पर निर्भर करता है कि वे अपने गांव को किस श्रेणी में लाना चाहते हैं.

वैसे लोकसभा के इस चुनाव में यह पहला मौका नहीं था जब मेनका गांधी की तरफ से ऐसा कोई विवादित बयान आया हो. इससे पहले सुल्तानपुर में ही एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि इस सीट पर उनकी जीत तय है. लेकिन उनकी जीत में मुस्लिम वोटर भागीदारी नहीं बने तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा. उनका यह भी कहना था कि मु​सलमान वोटरों के समर्थन के बगैर उनकी जीत हुई तो सुल्तानपुर से सांसद बनने के बाद वे भी मुस्लिमों के काम करने के प्रति दूसरा रवैया रखेंगी. उस बयान को देखते हुए चुनाव आयोग ने मेनका गांधी के चुनाव प्रचार करने पर दो दिन की रोक भी लगा दी थी.

2014 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी पीलीभीत से सांसद चुनी गई थीं. वहीं उनके बेटे वरुण गांधी को सुल्तानपुर से जीत मिली थी. लेकिन इस आम चुनाव में भाजपा ने मां-बेटे के संसदीय क्षेत्र आपस में बदल दिए हैं.