बीते हफ्ते अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति और दिग्गज डेमोक्रेटिक नेता जो बिडेन ने अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी. जो बिडेन की इस घोषणा के कुछ ही घंटे बाद डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर जमकर निशाना साधा. ट्रंप ने बिडेन की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव (प्रत्याशी चयन के लिए होने वाला चुनाव) में ही उनकी हार की भविष्यवाणी कर दी. ट्रंप ने इसके बाद कई ट्वीट किए और इनके जरिए जो बिडेन के उपराष्ट्रपति पद के कार्यकाल में बनी नीतियों पर निशाना साधा.

डोनाल्ड ट्रंप को हमेशा से उनके बड़बोलेपन के लिए जाना जाता रहा है. इसीलिए उनकी इस प्रतिक्रिया पर किसी को हैरानी नहीं हुई. और वैसे भी बिडेन से पहले राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में वेरमांट सेन, बर्नी सैं‌डर्स जैसे 20 नामी डेमोक्रेटिक नेता अपनी दावेदारी का ऐलान कर चुके हैं. यहां गौर करने वाली बात है कि ट्रंप ने इन लोगों को लेकर इतनी जल्दी और इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी थी. ऐसे में बिडेन को लेकर उनकी सक्रियता कई तरह के सवाल खड़े करती है.

बीते साल नवंबर में जब जो बिडेन के चुनाव में कूदने की चर्चा शुरू हुई थी तो अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट पॉलिटिको ने डोनाल्ड ट्रंप और उनके एक सहयोगी के बीच हुई वार्ता को सार्वजनिक किया था. इसमें ट्रंप अपने सहयोगी से बार-बार पूछ रहे हैं कि क्या हम बिडेन को चुनाव में हरा पाएंगे. इस घटना को ध्यान में रखते हुए कहा जा रहा है कि ट्रंप, बिडेन की घोषणा से परेशान हैं.

अमेरिकी राजनीतिक जानकार डोनाल्ड ट्रंप के इस डर की कई वजहें बताते हैं. सबसे बड़ी वजह जो बिडेन की लोकप्रियता और उनका राजनीतिक अनुभव है. 1973 में महज 29 साल की उम्र में बिडेन पहली बार सीनेटर का चुनाव जीते थे. इसके बाद 2008 तक लगातार सीनेटर रहे. 2009 में बराक ओबामा ने उन्हें उपराष्ट्रपति के तौर पर चुना और कई बार उन्हें अपना बड़ा भाई कहकर सम्बोधित किया था. ओबामा के कार्यकाल में आईं लगभग सभी योजनाओं को बनाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी. अमेरिका में 2012 में समलैंगिक शादियों को कानूनी मंजूरी दिलवाने से लेकर इराक और अफगानिस्तान के खिलाफ जंग में बिडेन ने अहम किरदार निभाया था. इसके अलावा ओसामा बिन लादेन को ठिकाने लगाने की रणनीति को लेकर ओबामा ने उनकी कई बार प्रशंसा भी की थी.

बराक ओबामा द्वारा बार-बार आगे बढ़ाए जाने से वे अमेरिका में राष्ट्रपति के बाद दूसरे लोकप्रिय नेता भी बने रहे. जानकारों की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप अब तक जिन नेताओं से मुकाबले की बात सोचकर बैठे थे, उनमें कोई भी बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के कद का नहीं था. इनमें कोई ऐसा भी नहीं था जिसकी अमेरिका के हर राज्य में पकड़ हो. लेकिन, जो बिडेन के मामले में ऐसा नहीं है. सर्वेक्षण भी बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप अगर किसी से राष्ट्रपति चुनाव हार सकते हैं तो वे जो बिडेन ही हैं. एक हालिया सर्वेक्षण में ट्रंप के मुकाबले आठ फीसदी ज्यादा लोग बिडेन को राष्ट्रपति के तौर पर देखना चाहते हैं.

बिडेन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप को जो दूसरी बात परेशान कर रही है, वह है मध्यम वर्ग और वर्किंग क्लास वोटर्स के बीच उनकी लोकप्रियता. पिछले चुनाव में इन तबकों के वोटरों ने ट्रंप की जीत में निर्णायक भूमिका निभायी थी. इसके अलावा ओबामा के साथ उनकी करीबियों की वजह से अफ़्रीकी मूल के अमेरिकियों के बीच भी वे काफी लोकप्रिय माने जाते हैं.

बराक ओबामा ने जो बिडेन के काम से खुश होकर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'प्रेजिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम' से नवाजा था | फोटो : एएफपी
बराक ओबामा ने जो बिडेन के काम से खुश होकर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'प्रेजिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम' से नवाजा था | फोटो : एएफपी

डोनाल्ड ट्रंप की 2016 में हुई जीत की वजह तीन राज्यों मिशिगन, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन को माना जाता है. ये राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के गढ़ की तरह देखे जाते हैं. लेकिन, 2016 में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने इन राज्यों में बड़ी जीत हासिल की थी. 2020 में होने वाले चुनाव को लेकर भी कहा जा रहा है कि अगर ट्रंप इन राज्यों को जीत लेते हैं तभी राष्ट्रपति बन पाएंगे. लेकिन, जो बिडेन के आने के बाद ट्रंप के लिए इन राज्यों में दोबारा जीत हासिल करना आसान नहीं होगा. एक तो जो बिडेन खुद पेंसिल्वेनिया से आते हैं. दूसरा इन तीनों राज्यों में अफ़्रीकी-अमेरिकी, मध्यम वर्ग और वर्किंग क्लास की जनसंख्या ज्यादा है.

डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सहयोगी और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के पूर्व चेयरमैन रीनस प्रीबस एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘रिपब्लिकन पार्टी को अगर फिर सत्ता में आना है तो मिशिगन, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन को फिर जीतना ही होगा, अभी तक ऐसा होने की उम्मीद थी भी, लेकिन बिडेन के ताल ठोकने के बाद यह काम आसान नहीं लगता.’

इसके अलावा विदेश नीति के महारथी माने जाने वाले बिडेन ने अधिकांश चुनावी मुद्दे मध्यम वर्ग और वर्किंग क्लास को ध्यान में रखकर उठाए हैं. इन मुद्दों में मजदूरों-कर्मचारियों को और अधिक अधिकार देना, मुफ्त शिक्षा, मध्यम वर्ग के टैक्स में रियायत प्रमुख हैं. अमेरिकी जानकारों की मानें तो 2016 में डोनाल्ड ट्रंप की जीत की वजह उनकी अमेरिका प्रथम की नीति रही थी. और अब बिडेन सीधे तौर पर इसे ही चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. ट्रंप की परेशानी की यह भी एक वजह है.

प्राइमरी चुनाव में जो बिडेन की स्थिति

गुरुवार को जो बिडेन की चुनाव में उतरने की घोषणा पर अब तक किसी डेमोक्रेटिक नेता ने कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है. यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति उम्मीदवारी के दावेदार के रूप में पार्टी के अंदर उनकी स्वीकार्यता सबसे ज्यादा है.

हाल में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक 75 फीसदी से ज्यादा डेमोक्रेटिक समर्थक बिडेन को ट्रंप के सामने सबसे अच्छा उम्मीदवार मानते हैं. सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव के 30 प्रतिशत मतदाता उनके समर्थन में हैं, जबकि काफी पहले से प्रचार कर रहे बर्नी सैंडर्स के मामले में यह आंकड़ा 26 फीसदी है.