चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महाराष्ट्र के वर्धा में दिए उनके भाषण के लिए क्लीन चिट दे दी है. पीटीआई के मुताबिक मंगलवार को इस मामले में चुनाव आयोग ने कहा, ‘मामले की आदर्श आचार संहिता के मौजूदा दिशा-निर्देशों/प्रावधानों, जनप्रतिनिधि कानून के तहत और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुरूप विस्तृत जांच पड़ताल की गई. उसके बाद आयोग का यह विचार है कि इस मामले में ऐसा कोई उल्लंघन नहीं दिखा है.’

नरेंद्र मोदी ने बीती एक अप्रैल को दिए उस भाषण में केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेस ने हिंदुओं का अपमान किया और देश के लोगों ने पार्टी को चुनाव में दंडित करने का फैसला किया है. उस पार्टी के नेता अब उन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने से डर रहे हैं जहां बहुसंख्यक (हिंदू) जनसंख्या का प्रभुत्व है. इसी कारण वे ऐसे स्थानों (वायनाड) पर शरण लेने के लिए बाध्य हैं जहां अल्पसंख्यक बहुसंख्या में हैं.’

कांग्रेस ने इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग से संपर्क कर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को ‘विभाजनकारी, नफरत फैलाने वाला और घृणित’ बताया था और कार्रवाई की मांग की थी. लेकिन करीब एक महीने के गहन विचार के बाद आयोग ने प्रधानमंत्री को आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप से मुक्त करने वाला फैसला सुनाया है.

वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि आयोग को आचार संहिता से जुड़ी अन्य शिकायतों पर भी विचार करना था. इनमें प्रधानमंत्री मोदी के लातूर भाषण से जुड़ी शिकायत भी शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक इन पर विचार करने के लिए आयोग के पास काफी कम समय है. इसके अलावा आयोग ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राहुल गांधी के खिलाफ की गई शिकायतों को लेकर भी सूची तैयार की है. इन पर आज विचार किया जाएगा.