भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ स्टॉक ब्रोकरों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 1,100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. खबर के मुताबिक इन ब्रोकरों ने अवैध लाभ कमाने के लिए अनधिकृत ट्रेड सॉफ्टवेयर, नेटवर्क और सर्वरों का इस्तेमाल किया. यह सब एनएसई के मुख्य ट्रेडिंग सर्वर वाले कमरे से किया गया. इस मामल में सेबी ने एनएसई के दो पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर रवि नारायण और चित्रा रामकृष्णा पर प्रतिबंध की कार्रवाई की है. ये दोनों अगले पांच सालों तक स्टॉक मार्केट में काम नहीं कर पाएंगे. साथ ही, एनएसई ने इन दोनों से कहा है कि जितने साल एनएसई ने ब्रोकरों को फायदा पहुंचाया, उतने सालों के वेतन का कुछ हिस्सा इन्हें लौटाना होगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस मामले में एनएसई पर तीन ब्रोकरों- ओपीजी सिक्यॉरिटीज, जेकीएन सिक्यॉरिटीज और वेटूवेल्थ सिक्यॉरिटीज को फायदे पहुंचाने का आरोप है. सेबी ने पांच अलग-अलग आदेश जारी कर इन तीनों ब्रोकरों पर भी पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है. उन्हें भी अपने अवैध लाभ और उस पर कमाए ब्याज की 51 करोड़ रुपये की रकम लौटाने को कहा गया है.

अखबार के मुताबिक अवैध लाभ कमाने का यह सिलसिला 2011 से 2014 के बीच चला था. इसमें एनएसई की भी भूमिका रही. इसलिए सेबी ने स्टॉक मार्केट में एनएसई पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है. साथ ही, एक अप्रैल, 2014 से 625 करोड़ रुपये का जुर्माना और 12 प्रतिशत ब्याज तथा 11 सितंबर, 2015 से 62 करोड़ु रुपये व 12 प्रतिशत ब्याज भरने का आदेश दिया है. एनएसई को आदेश जारी होन के 45 दिनों के अंदर यह जुर्माना देना होगा. इसके अलावा ओपीसी सिक्यॉरिटीज पर 15.6 करोड़ रुपये, वेटूवेल्थ पर 15.34 करोड़ु रुपये और जीकेएन पर 4.9 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा गया है. इन तीनों को पेनल्टी की रकम पर चार से पांच सालों का ब्याज भी भरना होगा.

हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक सेबी की कार्रवाई से एनएसई के सामान्य कारोबार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसके मौजूदा एमडी विक्रम लिमाय ने कहा कि भारतीय बाजारों में सभी निवेशकों का एनएसई पर विश्वास काफी मजबूत है. वहीं, एनएसई के एक प्रवक्ता का कहना है कि एक्सचेंज इस बारे में सेबी के आदेश की जांच कर रहा है जिसके बाद कानूनी रूप से उचित कदम उठाया जाएगा. उधर, नारायण और रामकृष्णा ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक सेबी की कार्रवाई के दायरे में और भी लोग आए हैं. इनमें वित्त मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अजय शाह भी शामिल हैं. सेबी ने उनके एनएसई की सूची में शामिल किसी भी कंपनी से जुड़ने पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया है. शाह पर आरोप है कि उन्होंने निजी फायदे के लिए एनएसई के संवेदनशील ट्रेडिंग डेटा का इस्तेमाल किया. उनके अलावा अन्य लोगों पर भी प्रतिबंध या जुर्माने की कार्रवाई की गई है.