आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर ने कथित रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को गुमराह किया था. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक मॉरीशस स्थित कंपनी ‘एस्सार स्टील मिनेसोटा एलएलसी’ को 36.5 करोड़ डॉलर (करीब 2,540 करोड़ रुपये) के कर्ज दिलाने के लिए चंदा कोचर ने आरबीआई को गलत जानकारियां दी थीं. खुद आरबीआई ने भी इस मामले से जुड़ी अपनी जांच में कई ‘अनियमितताओं’ का पता लगाया है.

अखबार ने इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच और जांचकर्ताओं व अधिकारियों के साक्षात्कारों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है. इसमें उसने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक ने एस्सार कंपनी की प्रोजेक्ट क्षमता को बढ़ाने संबंधी मंजूरी दी थी जिस पर आरबीआई ने जुलाई, 2014 के आसपास सवाल उठाए थे. उसके मुताबिक यह इस बात का संकेत था कि आईसीआईसीआई पुराने कर्ज को चुकाने के लिए एस्सार को नया कर्ज दे रहा है.

सितंबर, 2014 में आईसीआईसीआई ने आरबीआई को बताया कि उसने एस्सार को क्षमता बढ़ाने की मंजूरी दी है, लेकिन उसे किसी भी तरह का अतिरिक्त फंड मुहैया नहीं कराया है. अखबार के मुताबिक बैंक द्वारा दी गई यह जानकारी सही नहीं थी. क्योंकि जून, 2014 में उसने एस्सार को 36.5 लाख डॉलर का अतिरिक्त कर्ज दिया था. उसने दस्तावेजों के आधार पर बताया कि इस संबंध में बैंक की ऋण समिति ने कुछ ही मिनटों की बैठक में फैसला ले लिया था. चंदा कोचर उस बैठक का हिस्सा थीं. मामले से जुड़े रिकॉर्ड्स से साफ होता है कि उन्होंने एस्सार की फंडिंग को लेकर आरबीआई को ‘गुमराह’ किया था.

एस्सार स्टील मिनेसोटा, आईसीआईसीआई के सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है. अप्रैल, 2009 से मार्च, 2018 के बीच इस कंपनी को बैंक की तरफ से 71 लोन दिए गए. सूत्रों के मुताबिक इन कर्जों को लेकर हुई सभी बैठकों में से कम से कम 35 में चंदा कोचर ने हिस्सा लिया था. वहीं, दस्तावेज बताते हैं कि कंपनी को लेकर कई शिकायतें आ रही थीं. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने एस्सार के लिए नेगेटिव रेटिंग दी थी. खबर के मुताबिक इन सबकी अनदेखी की गई और कर्ज देना जारी रखा गया. इसे लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने चंदा कोचर से संपर्क किया था जिस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.