सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ सभी शिकायतों पर छह मई तक फैसला करने का आदेश दिया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि ये सभी शिकायतें चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी हैं. इससे पहले कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि आयोग इन शिकायतों के निपटारे में जानबूझकर देरी कर रहा है. उनका कहना था कि अभी तक इन दोनों नेताओं के खिलाफ 11 शिकायतें हुई हैं, लेकिन निपटारा सिर्फ दो का हुआ है.

पेप्सिको ने किसानों के खिलाफ दर्ज मामला वापस लिया

बहुराष्ट्रीय कंपनी (एमएनसी) पेप्सिको ने गुजरात के नौ किसानों के खिलाफ दर्ज मामला वापस ले लिया है. इन सभी पर आलू की एक विशेष किस्म का उत्पादन करने का आरोप था जिसका इस्तेमाल कंपनी लेज चिप्स बनाने में करती है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक पेप्सिको के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा, ‘सरकार के साथ बातचीत के बाद कंपनी ने किसानों के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने का फैसला किया है. हम इस बात पर भरोसा कर रहे हैं कि बीज के संरक्षण से जुड़े सभी मुद्दों पर लंबे समय के लिए सौहार्दपूर्ण समाधान खोजा जाएगा.’ पेप्सिको ने इन नौ में से चार किसानों पर बीते महीने मामला दर्ज किया था. इसके बाद कंपनी को राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के साथ सोशल मीडिया पर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदान के समय से जुड़ी एक याचिका पर फैसला लेने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से एक याचिका पर विचार कर फैसला लेने को कहा है. इस याचिका में रमजान को देखते हुए लोकसभा चुनाव के बाकी तीन चरणों के दौरान मतदान सुबह सात बजे की जगह पांच बजे शुरू करने की अपील की गई है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक याचिकाकर्ता ने कहा है कि ऐसा करने से वोटिंग प्रतिशत भी बढ़ सकता है. इस महीने की छह तारीख से रमजान शुरू होने वाला है. उसी दिन पांचवें चरण का मतदान है. इसके बाद 12 मई को छठवें और 19 मई को सातवें चरण के लिए वोटिंग होनी है. आम तौर पर मतदान के लिए सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक का समय तय किया जाता है.

चुनाव आयोग ने शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की सशर्त मंजूरी दी

चुनाव आयोग ने देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की सशर्त मंजूरी दे दी है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक आयोग ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थान विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार या लिखित परीक्षा ले सकते हैं. हालांकि, चयनित उम्मीदवारों की सूची और नियुक्ति पत्र 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए जाने के बाद ही जारी किए जा सकते हैं. इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों की मांग पर इस नियुक्ति प्रक्रिया के लिए आयोग से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी की मांग की थी. बीती सात मार्च को केंद्रीय कैबिनेट ने केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान अध्यादेश को मंजूरी दी थी. इसके अगले दिन यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था. हालांकि, चुनाव आयोग ने 10 मार्च को चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया. इस वजह से आचार संहिता लागू हो गई.

लोकपाल को अब तक स्थायी कार्यालय नहीं, पांच सितारा होटल में कामकाज

देश के पहले लोकपाल को अब तक स्थायी कार्यालय उपलब्ध नहीं कराया गया है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक अभी तक इसका दफ्तर नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा होटल ‘द अशोक’ में था. वहीं, कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि इस होटल के किराए का अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया है. उसका यह भी कहना है कि सरकार इसके लिए एक स्थायी दफ्तर की तलाश में है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 23 मार्च, 2019 को न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल के पद की शपथ दिलाई थी.

चुनाव प्रचार में बच्चों के कथित इस्तेमाल पर प्रियंका गांधी वाड्रा को नोटिस

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनाव प्रचार में कथित तौर पर बच्चों का इस्तेमाल करने पर नोटिस जारी किया है. दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक आयोग ने उनसे तीन दिनों के भीतर इस मामले से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. एनसीपीसीआर ने इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के अगस्त, 2014 में दिए गए एक आदेश का हवाला दिया है. इस आदेश के मुताबिक चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल की मनाही है. बताया जाता है कि आयोग ने यह कदम एक वीडियो के आधार पर लिया है. इस वीडियो में प्रियंका की मौजूदगी में बच्चे ‘चौकीदार चोर है’ के साथ आपत्तिजनक नारे लगाते हुए दिखे थे. हालांकि, इस पर कांग्रेस महासचिव ने बच्चों से इस तरह के नारे न लगाने की बात कही थी.