शिवसेना के नेता संजय राउत ने मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी के ‘रामायण और महाभारत’ को लेकर दिए एक बयान पर पलटवार किया है. खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ बुराई पर अच्छाई और सत्य की असत्य पर विजय का संदेश देते हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने राम, कृष्ण और अर्जुन जैसे चरित्रों को सच्चाई का प्रतीक भी बताया है. संजय राउत ने आगे कहा, ‘अगर येचुरी को रामायण-महाभारत में हिंसा दिखती है तो कल वे यह भी कहेंगे कि पाकिस्तान से लड़ने वाले जवान हिंसा कर रहे हैं. या फिर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाकर्मी आतंकवादियों के खिलाफ जो कार्रवाई करते हैं उसको भी वे हिंसा बताएंगे.’

संजय राउत के मुताबिक, ‘सीताराम येचुरी की यह विचारधारा उनकी अपनी विचारधारा है जिसका एकमात्र उद्देश्य हिंदुओं पर हमला करके खुद को धर्मनिरपेक्ष बताना है.’ इसके साथ ही सवालिया लहजे में उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें रामायण-महाभारत में इतनी ही हिंसा दिखाई देती है तो वे अपने नाम में से ‘सीताराम’ शब्द को क्यों नहीं हटा देते. उन्हें अपनी पार्टी के प्रत्याशी कन्हैया कुमार का नाम भी बदल देना चाहिए क्योंकि उनका नाम भी कृष्ण के नाम पर है.

इससे पहले सीताराम येचुरी ने एक कार्यक्रम में दिए संबोधन में कहा था, ‘कौन कहता है हिंदू हिंसक नहीं हो सकते.’ इसके लिए उन्होंने रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों का उदाहरण भी दिया था. साथ ही कहा था कि ये दोनों ग्रंथ हिंसा की घटनाओं के उदाहरणों से भरे पड़े हैं. उनका यह भी कहना था, ‘इन ग्रंथों के प्रचारक इनकी कथाओं का वर्णन करते हैं साथ ही यह दावा भी करते हैं कि हिंदू हिंसक नहीं हो सकता. ऐसे में यह कहने का क्या तर्क है कि एक धर्म हिंसा में संलग्न है वहीं हिंदू हिंसा नहीं करते.’