प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों पर चुनाव आयोग द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के मामले में नई जानकारी सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों नेताओं को क्लीन चिट दिए जाने से जुड़े आदेशों में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की राय को शामिल नहीं किया गया. बता दें कि अशोक लवासा ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट दिए जाने पर असहमति जताई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स (एचटी) में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस मामले से जुड़े लोगों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि लवासा की असहमति को रिकॉर्ड में नहीं रखा गया, लेकिन अंतिम आदेश में इसे शामिल किया जा सकता है. उसके बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा. इसके साथ एक अधिकारी ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने मोदी और शाह के खिलाफ की गई शिकायतों पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह को आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े सभी मामलों में क्लीन चिट दे दी गई है. एचटी ने इनमें से दो के आदेश देखने का दावा करते हुए कहा है कि इनमें चुनाव आयुक्त अशोक लवासा द्वारा जताई गई असहमति का जिक्र नहीं है. अखबार ने बताया कि चुनाव आयोग के एक अन्य अधिकारी ने पहले कहा था कि आचार संहिता से जुड़े निर्णय अदालती फैसलों जैसे नहीं होते, इसलिए लवासा की राय को रिकॉर्ड में नहीं लिया गया.

इस पर एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में चुनाव आयोग को संबंधित शिकायत, जिसके खिलाफ शिकायत है उसके जवाब और अंतिम आदेश को रिकॉर्ड में रखना होता है. यह आदेश हमेशा विस्तृत रूप में होता है.’ पूर्व सीईसी ने आगे कहा, ‘आचार संहिता के मामलों में न्याय होना चाहिए. आरोपित को सफाई देने का मौका दिया जाना चाहिए... कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए.’