सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर पूछे एक सवाल के जवाब में सेना ने कहा है कि सितंबर 2016 से पहले ऐसी किसी कार्रवाई के होने का कोई आंकड़ा उसके पास मौजूद नहीं है. खबरों के मुताबिक सेना की तरफ से दिया गया यह जवाब सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कांग्रेस की तरफ से किए दावों पर विरोधाभास पैदा करता है.
इससे पहले भारतीय सेना की तरफ से की गई सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर जम्मू-कश्मीर के रोहित चौधरी ने एक आरटीआई लगाई थी. इससे उन्होंने पूछा था कि साल 2004 से 2014 और फिर सितंबर 2014 के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान में कितनी सर्जिकल स्ट्राइक की हैं. उन्होंने इसका जवाब भी मांगा था कि उनमें से ऐसी किनती कार्रवाइयां सफल रही हैं.
इसके जवाब में सेना के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, लेफ्टिनेंट कर्नल एडीएस जसरोटिया ने कहा है, ‘भारतीय सेना ने 29 सितंबर 2016 को नियंत्रण रेखा के नजदीक सर्जिकल स्ट्राइक की थी. उस कार्रवाई में देश के किसी जवान का नुकसान नहीं हुआ था.’ इसके अलावा सेना ने साफ तौर पर यह भी कहा है कि सितंबर 2016 की इस कार्रवाई के अलावा उसके पास इसका कोई और आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
इससे पहले बीते हफ्ते एक इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में भी कई सर्जिकल स्ट्राइक होने का दावा किया था. उस इंटरव्यू के बाद कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐसी छह कार्रवाइयां किए जाने की तारीखें भी बताई थीं. तब उन्होंने यह भी कहा था कि दो सर्जिकल स्ट्राइक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में भी हुई थीं.
हालांकि दूसरी तरफ थलसेना के पूर्व प्रमुख और केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने कांग्रेस के उस दावे पर सवाल उठाए थे. साथ ही एक ट्वीट के जरिये उन्होंने कहा था, ‘क्या मुझे बता सकते हैं कि थल सेना के प्रमुख के तौर पर मेरे कार्यकाल के दौरान आप कौन-सी सर्जिकल स्ट्राइक होने की बात कर रहे हैं.’
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