सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनाव आयोग से कहा कि वह बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव की वाराणसी संसदीय सीट से नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दर्ज शिकायत पर गौर करे. तेज बहादुर ने वाराणसी संसदीय सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था. चुनाव आयोग ने कुछ जरूरी कागजात न दिखा पाने का हवाला देकर उनका नामांकन रद्द कर दिया था. उसी के खिलाफ पूर्व बीएसएफ जवान ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इसमें उन्होंने आयोग के फैसले को पक्षपातपूर्ण और तर्कहीन बताते हुए इसे निरस्त करने का अनुरोध किया है.

पीटीआई के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा कि वे इस संबंध में आवश्यक निर्देश प्राप्त करके गुरुवार को अदालत को अवगत कराएं. उधर, तेज बहादुर यादव के वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान भी चुनाव याचिका दायर की जा सकती है.

तेज बहादुर यादव को बीएसएफ में जवानों को मिलने वाले भोजन के बारे में एक शिकायती वीडियो पोस्ट करने की घटना के बाद बर्खास्त कर दिया गया था. कुछ समय पहले उन्होंने वाराणसी से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. वे अपने कुछ साथियों के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे. उसी दौरान समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपने टिकट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया जिसे उन्होंने मान लिया. इसे लेकर तमाम मीडिया में चर्चा चल रही थी कि चुनाव आयोग ने यादव को नोटिस जारी कर दिया. बाद में उनका नामांकन रद्द कर दिया गया.