सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को अंतिम रूप देने के लिए तय की गई 31 जुलाई की तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. इस खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इससे जुड़े अधिकारियों से कहा, ‘बहादुर बनें और कानून का ध्यान रखते हुए 31 जुलाई तक एनआरसी को अंतिम रूप दें.’ इससे पहले समन्वय अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट को इसे अंतिम रूप देने में आ रही दिक्कतों से अवगत कराया था. उन्होंने कहा था कि एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के दौरान अनेक लोगों के नाम उसमें से छूट गए थे. इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने आपत्ति जताई थी. हालांकि, ऐसे लोग अब आपत्ति निवारण समिति के सामने नहीं आ रहे हैं.

राबड़ी देवी ने नरेंद्र मोदी को ‘जल्लाद’ बुलाया, संजय निरुपम ने ‘आधुनिक समय का औरंगजेब’ कहा

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जल्लाद’ बताया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक उन्होंने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा नरेंद्र मोदी को दुर्योधन की तरह बताए जाने पर यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (प्रियंका) दुर्योधन की तरह बोलकर गलत किया है. दूसरा भाषा बोलना चाहिए उनको, वो सब जल्लाद हैं. जो जज और पत्रकार को मरवा देता है, उठवा लेता है. ऐसे आदमी का मन और विचार कैसा होगा, खूंखार होगा.’ वहीं, कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने नरेंद्र मोदी को ‘आधुनिक समय का औरंगजेब’ करार दिया है. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘उन्होंने (प्रधानमंत्री) उन मंदिरों को तोड़ दिया जिन्हें वाराणसी के लोगों ने औरंगजेब के क्रूर शासन से बचाया था.’

23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने में ‘पांच घंटे’ की देरी

चुनाव आयोग ने 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने में पांच घंटे की देरी होने की बात कही है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक इस देरी की वजह ईवीएम के वोटों से वीवीपैट का मिलान किया जाना है. इसकी जानकारी उपचुनाव आयुक्त सुदीप जैन ने दी. इससे पहले ईवीएम को लेकर की जा रही शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने सभी पोलिंग बूथों पर ईवीएम के साथ वीवीपैट लगाने का फैसला किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक संसदीय क्षेत्र के केवल पांच मतदान केंद्रों के ईवीएम वोटों और वीवीपैट का मिलान किया जाना है. वहीं, विपक्षी दलों ने इसके लिए 50 फीसदी पोलिंग बूथों को इसके दायरे में लाने की मांग की थी. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था.

चुनावी नतीजे घोषित होने से पहले विपक्षी दलों की बैठक

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर 21 मई को विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की योजना पर बातचीत की. राहुल ने इस योजना पर अपनी सहमति जाहिर की है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक बातची में इन दोनों नेताओं ने चुनाव के बाद संभावित परिदृश्य पर चर्चा की. साथ ही, इनके बीच वीवीपैट, पांच चरणों के मतदान प्रतिशत और आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव के घटनाक्रमों पर भी बातचीत हुई. बताया जाता है कि इससे पहले नायडू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात की थी. वहीं, गुरुवार को वे तृणमूल सुप्रीमो के साथ चुनावी जनसभा में भी दिखेंगे. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के चुनावी नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे.

उत्तराखंड : चारधाम सड़क परियोजना को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत

उत्तराखंड में चारधाम सड़क परियोजना को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. हिन्दुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई 17 जुलाई, 2019 तक स्थगित कर दी है. माना जा रहा है कि इसकी वजह से अब सरकार को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लंबा समय मिल गया है. इससे पहले अदालत ने बीती 11 जनवरी को इसके निर्माण पर लगी रोक को हटा ली थी. राज्य के चार धामों- बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को जोड़ने वाली इस सड़क की कुल लंबाई 900 किमी की है. बताया जाता है कि हर मौसम में यह रास्ता खुला रहेगा. साथ ही, सामरिक दृष्टि से भी उपयोगी होगा.

पुडुचेरी की उपराज्यपाल के अधिकारों को लेकर मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी के अधिकारों को लेकर मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील की. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की अपील की है. उनका कहना है कि इस केंद्र शासित प्रदेश में शासन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने तुषार मेहता की इस मांग को खारिज कर दिया. इससे पहले 30 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट ने उपराज्यपाल के अधिकारों को बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से 2017 में जारी दो आदेशों को खारिज कर दिया था.