सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस अनिरुद्ध बोस और एएस बोपन्ना को शीर्ष अदालत में पदोन्नत किए जाने को लेकर सरकार की तरफ से लगाई आपत्तियों को खारिज किया है. साथ ही कॉलेजियम ने कहा है कि ‘वरिष्ठता पर मेरिट को तरजीह’ दी जानी चाहिए. इसी तर्क के आधार पर कॉलेजियम ने सरकार के पास एक बार फिर इन दोनों जजों के नामों को आगे बढ़ाते हुए इन पर विचार करने को कहा है.

एनडीटीवी के मुताबिक हाईकोर्ट के इन दोनों जजों के साथ ही कॉलेजियम ने सरकार से जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्य कांत को भी शीर्ष अदालत में नियु​क्त किए जाने संबंधी सिफारिश की है. मौजूदा समय में जस्टिस गवई बॉम्बे हाईकोर्ट तो वहीं जस्टिस सूर्य कांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे हैं.

इससे पहले बीते 12 अप्रैल को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एएस बोपन्ना को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने संबंधी सिफारिश की गई थी. लेकिन सरकार ने कॉलेजियम की उस सिफारिश पर इन दोनों जजों की वरिष्ठता को देखते हुए आपत्ति दर्ज की थी. साथ ही इन दोनों नामों पर कॉलेजियम से पुनर्विचार करने को कहा था.

इधर कॉलेजियम ने यह भी कहा है, ‘हमने बड़ी ही सावधानी से वरिष्ठता, योग्यता, आचरण और सत्यनिष्ठा के आधार पर पदोन्नति के लिए इन नामों का चयन किया है.’ सुप्रीम कोर्ट के इस कॉलेजियम में भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सहित शीर्ष अदालत के जस्टिस एसए बोबडे, एनवी रमण, अरुण मिश्रा और आरएफ नरीमन शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट में जजों के 31 पद स्वीकृत हैं. मौजूदा समय में यहां जजों की संख्या 27 है.