अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मसले को हल करने के लिए गठित मध्यस्थता पैनल ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. अब सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर कल यानी इसी शुक्रवार को सुनवाई करेगा. यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली संविधान पीठ करेगी. साथ ही जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर भी इस खंडपीठ के अन्य सदस्यों में शामिल होंगे.

इससे पहले इसी साल आठ मार्च को अयोध्या मसले का समाधान निकालने के लिए शीर्ष अदालत ने तीन सदस्यों वाला एक पैनल गठित किया था. सुप्रीम कोर्ट के ही सेवानिवृत्त जज जस्टिस फाकिर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला के नेतृत्व वाले उस पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के अलावा वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को भी शामिल किया गया था.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पैनल से आठ हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था. साथ ही इस पैनल को अपनी कार्रवाई बंद कमरे में करने के साथ ही मीडिया से दूरी बनाने के निर्देश भी दिए थे. इस दौरान मध्यस्थता पैनल के किसी सदस्य ने इस रिपोर्ट के बारे में मीडिया के साथ कोई बातचीत नहीं की है. ऐसे में अयोध्या मसले को लेकर अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर रहेंगी.

उधर, दशकों से चले आ रहे इस विवाद पर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था. तब हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि निर्मोही अखाड़ा, उत्तर प्रदेश के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान के बीच बांटने के आदेश दिए थे. इसके बाद हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इस दौरान इस साल कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से इस मसले को प्राथमिकता के आधार पर सुनने की गुजारिश की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था.