प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर नौसेना के युद्धपोत ‘आईएनएस विराट’ को ‘टैक्सी’ बनाने का आरोप लगाए जाने पर सोशल मीडिया में आज भी बहस चल रही है. नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक चुनावी रैली में पूर्व प्रधानमंत्री पर यह आरोप लगाया था. उनके इस दावे को कई वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने खारिज किया है और इनमें सबसे बड़ा नाम पूर्व नौसेना प्रमुख एल रामदास का है. उन्होंने बाकायदा एक स्टेटमेंट जारी करके नरेंद्र मोदी के आरोप को गलत बताया है. इस हवाले से फेसबुक और ट्विटर पर एक बड़े तबके ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाया है. पत्रकार मिहिर शर्मा का ट्वीट है, ‘आईएनएस विराट के तत्कालीन कैप्टेन सहित चार पूर्व एडमिरल कह रहे हैं कि मोदी राजीव गांधी के बारे में सच नहीं बोल रहे. यानी मोदी न सिर्फ तीन दशक पुराने विवाद याद कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी तरह से गढ़ भी रहे हैं.’

नरेंद्र मोदी बीते समय में कांग्रेस को घेरने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम का इस्तेमाल करते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से वे अचानक राजीव गांधी के नाम लेने लगे हैं. सोशल मीडिया में इस बात पर भी कई लोग हैरानी जता रहे हैं और इसको लेकर दिलचस्प टिप्पणियां कर रहे हैं. उनके ताजा बयान पर अशोक स्वैन ने चुटकी ली है, ‘पिछले पांच दिनों से मोदी के लिए राजीव गांधी नेहरू बन गए हैं...’ सोशल मीडिया में इसी विवाद पर आई कुछ और टिप्पणियां :

उमर अब्दुल्ला | @OmarAbdullah

क्या मोदी जी को टाइम मशीन मिल गई है? ऐसा लग रहा है कि वे 1989 का आम चुनाव लड़ रहे हैं और राजीव गांधी उनके मुख्य विरोधी हैं!...

अतुल खत्री | @one_by_two

मैं इस पर सहमत हूं कि किसी नेता को नौसेना का युद्धपोत निजी टैक्सी की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लेकिन नेताओं को प्रिंट और टीवी मीडिया को अपने सोशल मीडिया अकाउंट की तरह भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

जेट ली (वसूली भाई) | @Vishj05

सेना : हमने उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की थी.
भक्त (भाजपा समर्थक) : किसी को भी सेना पर सवाल नहीं उठाना चाहिए.
पूर्व नौसेना प्रमुख : राजीव गांधी ने आईएनएस विराट का निजी इस्तेमाल नहीं किया था.
भक्त (भाजपा समर्थक) : आपके पास इस बात का कोई सबूत है!

निखिल वागले | @waglenikhil

मोदी द्वारा राजीव गांधी को चुनावी मुद्दा बनाना दिखाता है कि उन्होंने अपनी सरकार की असफलता मान ली है. उनके पास पांच साल का कोई काम दिखाने के लिए नहीं है. मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जो चुनाव नतीजों की घोषणा के पहले ही हार चुके हैं.