सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया है. समिति के अध्यक्ष जस्टिस एफएम कलीफुल्ला (रिटायर्ड) ने इस मामले का हल निकालने के लिए अदालत से और समय मांगा था जिसकी इजाजत दे दी गई. मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पक्षों को भी 30 जून तक समिति के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति दी है. पीटीआई ने बताया कि इस दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया के बीच कोई नहीं आएगा. वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘हम यह नहीं बताएंगे कि मामला कितना आगे बढ़ा है. यह गोपनीय है.’

उधर, जस्टिस कलीफुल्ला की ओर से और समय मांगे जाने के बाद मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कहा कि अगर मध्यस्थता से कोई हल निकलता है तो वे इस संबंध में किए गए सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं. इससे पहले इसी साल आठ मार्च को अयोध्या मसले का समाधान निकालने के लिए शीर्ष अदालत ने तीन सदस्यों वाला एक पैनल गठित किया था. सुप्रीम कोर्ट के ही सेवानिवृत्त जज जस्टिस फाकिर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला के नेतृत्व वाले उस पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के अलावा वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को भी शामिल किया गया था.