‘भाजपा कभी नरेंद्र मोदी या फिर अमित शाह की पार्टी नहीं हो सकती.’  

— नितिन गडकरी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता

नितिन गडकरी ने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘अगर अतीत देखें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कभी अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की पार्टी भी नहीं रही. ऐसा इसलिए क्योंकि यह विचारधारा पर आधारित पार्टी है.’ इस मौके पर नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लोकप्रिय नेता भी बताया और कहा, ‘चुनाव जीतने के लिए किसी भी पार्टी को मजबूत नेता की जरूरत होती है. यही वजह है कि भाजपा ने उन्हें अपना चेहरा बनाया है.’

‘नरेंद्र मोदी का सपा-बसपा गठबंधन पर जातिवादी होने का आरोप हास्यास्पद और अपरिपक्व है.’  

— मायावती, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष

मायावती ने यह बात एक ट्वीट के जरिये नरेंद्र मोदी के एक बयान पर पलटवार करते हुए कही है. इसी ट्वीट से सवालिया लहजे में उन्होंने यह भी कहा, ‘जातिवाद के अभिशाप से पीड़ित लोग जातिवादी कैसे हो सकते हैं.’ मायावती ने आगे कहा, ‘मोदी जन्म से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नहीं है इसलिए उन्होंने जातिवाद का दंश नहीं झेला है. यही वजह है कि वे झूठी बातें करते हैं.’ इससे पहले इसी गुरुवार को नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी (सपा)-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन को ‘जातिवाद की राजनीति’ करने वाला बताया था.


‘हिंदी नहीं आने के कारण गड़बड़ हो गई.’  

— सैम पित्रोदा, ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख

सैम पित्रोदा ने यह बात 1984 के दंगों को लेकर इसी गुरुवार को दिए अपने बयान की सफाई देते हुए कही है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह ‘जो हुआ वह बुरा हुआ’ कहना चाहते थे. लेकिन दिमाग में ठीक से अनुवाद न कर पाने की वजह से ‘जो हुआ वह हुआ’ बोल गए थे. सैम पित्रोदा ने आगे कहा, ‘मुझे खेद है कि मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया. मैं इसके लिए माफी मांगता हूं.’


‘कांग्रेस के लिए लोगों की जिंदगियों का कोई मोल नहीं है.’  

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी ने बात पंजाब में एक रैली संबोधित करने के दौरान, सैम पित्रोदा के 1984 के सिख दंगों को लेकर दिए बयान के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कही. इस मौके पर सवालिया लहजे में उन्होंने कहा, ‘क्या पंजाब के लोग उन दंगों को भूल सकते हैं. उन दंगों के पीछे भला कौन था. वे कौन लोग हैं जिनकी वजह से इसके पीड़ितों को अब तक इंसाफ नहीं मिल पाया है.’ इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 1984 के वह दंगा कांग्रेस के दामन पर लगा ऐसा दाग है जो कभी मिट नहीं सकता.


‘अगर अरविंद केजरीवाल साबित कर दें कि पर्चा विवाद से मेरा कोई लेना-देना है तो मैं सार्वजनिक रूप से फांसी लगा लूंगा.’  

— गौतम गंभीर, पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से भाजपा के प्रत्याशी

गौतम गंभीर ने यह बात एक ट्वीट के जरिये आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को चुनौती देते हुए कही है. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘अगर अरविंद केजरीवाल ऐसा नहीं कर पाते तो उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए.’ इसके साथ ही सवालिया लहजे में उन्होंने आगे कहा, ‘क्या केजरीवाल को यह चुनौती स्वीकार है.’ इससे पहले इसी गुरुवार को पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से आप की प्रत्याशी आतिशी मर्लेना ने गंभीर पर उनके खिलाफ ‘आपत्तिजनक पर्चे’ बंटवाने के आरोप लगाए थे.