राजस्थान के अलवर में एक दलित महिला से सामूहिक बलात्कार व पिटाई के मामले में नई जानकारी सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना की शिकायत किए जाने के सात दिन बाद तक पुलिस ने किसी आरोपित को इसलिए गिरफ्तारी नहीं किया, क्योंकि उसे क्षेत्र में चुनाव खत्म होने का इंतजार था. रिपोर्ट की मानें तो पुलिस ने शिकायतकर्ता और पीड़ित परिवार से खुद यह बात कही.

बीती 26 अप्रैल को हुई इस घटना की 30 अप्रैल को शिकायत की गई थी. लेकिन सात मई से पहले पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक पुलिस ने पीड़ित परिवार से कहा था कि छह मई को अलवर में लोकसभा चुनाव का मतदान होना है, तब तक उन्हें पुलिस की कार्रवाई का इंतजार करना होगा. पीड़िता के पिता ने अखबार को बताया कि उन्होंने पुलिस को जानकारी दी थी कि आरोपित पास के गांव में ‘पार्टी’ कर रहे हैं, फिर भी उसने कोई कार्रवाई नहीं की. पिता ने कहा, ‘उसने हमें चुनाव खत्म होने तक इंतजार करने को कहा.’

बीती छह मई को राजस्थान की 12 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी. इनमें अलवर की सीट भी शामिल थी. खबर के मुताबिक मतदान के अगले दिन पहली गिरफ्तारी की गई. लेकिन उससे पहले सभी आरोपित पीड़िता और उसके परिवार को बलात्कार के वीडियो को सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने की धमकी देकर दस हजार रुपये मांगते रहे. उधर, पुलिस की इस लापरवाही का पता चलने के बाद अलवर के एसपी राजीव पाचर को हटा दिया गया है और स्थानीय एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है. वहीं, इस घटना को लेकर घिरी अशोक गहलोत सरकार ने कहा है कि वह मामले की ऑफिसर स्कीम के तहत निगरानी कराएगी.

गौरतलब है कि बीती 26 अप्रैल को अलवर-थानागाजी हाइवे पर पांच बाइक सवार पीड़ित दंपती को जबरन अगवा कर एक सुनसान इलाके में ले गए थे. वहां उन्होंने दोनों पति-पत्नी के साथ काफी मारपीट की और महिला का गैंगरेप किया. इस दौरान आरोपित वीडियो भी बनाते रहे. खबरों के मुताबिक दुष्कर्म के बाद उन्होंने पीड़ितों से पैसे भी छीन लिए थे.