पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के तटीय शहर ग्वादर के एक पांच सितारा होटल पर बीते हफ्ते कुछ आतंकियों ने हमला किया था. बताया जाता है कि भारी गोला-बारूद के साथ इस होटल में तीन आतंकवादी घुस गए थे. कई घंटे चली सैन्य कार्रवाई के बाद इन सभी को मार गिराया गया है. इस हमले में होटल के चार कर्मचारियों और पाकिस्तानी सेना के एक जवान की भी मौत हुई है. इस हमले के दौरान आतंकियों का निशाना होटल में रुके चीनी नागरिक थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया.

इस हमले की जिम्मेदारी अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है. बीएलए पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में सक्रिय एक अलगाववादी संगठन है. यह दशकों से एक अलग देश की मांग कर रहा है. पाकिस्तान की सरकार ने इसे एक आतंकी संगठन घोषित कर रखा है. बीएलए इससे पहले भी चीन के नागरिकों और उसकी परियोजना से जुड़े लोगों को निशाना बना चुका है.

बीते नौ महीनों में पांचवां हमला

बीते नौ महीनों में चीन के नागरिकों और उसकी परियोजनाओं को निशाना बनाकर किया गया यह पांचवां हमला है. बीते साल अगस्त में बीएलए ने बलूचिस्तान के डेरा बुगती जिले में चीनी नागरिकों और इंजीनियरों को ले जा रही एक बस को निशाना बनाते हुए आत्मघाती हमला किया था. इसमें तीन चीनी नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए थे. इसके बाद बीते नवंबर में पाकिस्तान के कराची स्थित चीन के वाणिज्यक दूतावास पर आत्मघाती हमला हुआ. इस हमले में दो पुलिस अधिकारियों और वीजा लेने आए पाकिस्तान के दो नागरिकों को जान गंवानी पड़ी थी.

इस साल की बात करें तो 17 फरवरी को बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) मार्ग पर एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. इसमें नौ लोग मारे गए थे. इस हमले को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ने वाले तीन संगठनों बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट और बलूच रिपब्लिकन गार्ड ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया था. इसके बाद बीते 30 मार्च को सीपीईसी में कार्यरत चीनी इंजीनियरों को ले जा रहे 22 वाहनों के काफिले पर कराची में हमला किया गया. इसमें भी कुछ चीनी कर्मचारियों सहित कई लोग घायल हुए थे.

चीन का इतना विरोध क्यों?

पाकिस्तान के पत्रकार बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठनों द्वारा चीन का विरोध किए जाने की पहली बड़ी वजह चीन द्वारा पाकिस्तान में किए जा रहे 60 अरब डॉलर के भारी निवेश को बताते हैं. चीन के इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान में ही खर्च किया जा रहा है. दरअसल, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का सबसे अहम भाग बलूचिस्तान का ग्वादर बंदरगाह है. इस वजह से चीन इस प्रांत में गलियारे के साथ-साथ कई अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है. वह बलूचिस्तान में बुनियादी ढांचा, परिवहन और ऊर्जा परियोजनाओं जैसे एलएनजी (लिक्विड नैचुरल गैस) टर्मिनल और गैस पाइपलाइन में भी निवेश कर रहा है. ग्वादर बंदरगाह के करीब ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र का निर्माण भी किया जा रहा है, जिसमें करीब पांच लाख चीनियों के रहने की व्यवस्था होगी. कुल मिलाकर देखें तो बलूचिस्तान चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट की रीढ़ जैसा है.

जानकारों की मानें तो चीन की परियोजनाओं को पाकिस्तान की सरकार देश का भाग्य बदलने वाली कवायद मानती है. लेकिन, बलूचिस्तान जो इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा है, वहां के लोगों को इसका कोई फायदा नहीं हो रहा. बताते हैं कि चीन के इतने बड़े निवेश के बाद बलूचिस्तान के लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार आदि की उम्मीद जगी थी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. चीनी प्रोजेक्ट्स में मैन पॉवर से लेकर मटीरियल और मशीनरी तक सब चीन के ही इस्तेमाल हो रहे हैं. प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट भी चीनी ठेकेदारों को ही दिए जा रहे हैं.

इसके अलावा बलूचिस्तान के लोग गलियारे के लिए जमीनों के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर भी खासे नाराज हैं. साथ ही यहां सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता के अभाव और भ्रष्टाचार होने के आरोप भी लग रहे हैं. डॉन के वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद अकबर नोटज़ई अपनी एक टिप्पणी में लिखते हैं कि पाकिस्तान की सरकार भी बलूच लोगों को लेकर काफी गैरजिम्मेदार दिखी है. सीपीईसी की घोषणा से लेकर अब तक किसी भी सरकारी दस्तावेज में यह नहीं कहा गया है कि बलूचियों को इस निवेश का कोई लाभ होगा या दिया जाएगा.

कुछ जानकारों के मुताबिक जब से बलूचिस्तान में चीन की परियोजनाओं की घोषणा हुई है तब से वहां व्यापारिक संभावनाओं को देखते हुए अन्य प्रांतों के लोगों ने बड़े स्तर पर निवेश करना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये लोग बलूचिस्तान के ग्रामीण इलाकों में बहुत कम दामों पर जमीनें खरीद रहे हैं.

पाकिस्तानी पत्रकारों की मानें तो बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठनों के साथ वहां के आम लोगों को भी लगता है कि चीन की सीपीईसी परियोजना की वजह से उनके यहां जो कुछ हो रहा है, वह बलूच समुदाय के लिए बड़ी तबाही जैसा होगा. इनका मानना है कि इससे न सिर्फ वे प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों की प्रचुरता वाली अपनी जमीन खो देंगे बल्कि बाहरी लोगों के बड़ी संख्या में उनके यहां बसने से वे अपनी पहचान भी खो देंगे. यही वजह है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी सहित इस प्रांत के सभी अलगाववादी संगठन चीन के खिलाफ हो गए हैं.

पिछले दिनों चीनी काफिले पर हमले के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाक प्रधानमंत्री इमरान खान और चीनी सरकार के लिए एक संदेश जारी किया था. इसमें बीएलए कमांडर जीयन बलूच ने कहा था, ‘हमारे लड़ाके अपनी जमीन की रक्षा करने में सक्षम हैं. बीएलए की नीति साफ़ है कि वह चीन या किसी भी अन्य बाहरी ताकत को अपने क्षेत्र की धन-संपदा लूटने नहीं देगा. पाकिस्तान सरकार और चीन दोनों ही बलूचिस्तान में बलूचों की ही पहचान खत्‍म करना चाहते हैं....इस तरह के हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक चीन पाकिस्तान के साथ अपनी सांठगांठ को खत्म नहीं कर देता.’

अलगाववादियों की ताकत में लगातार इजाफा

ग्वादर के पांच सितारा होटल और अन्य हमलों के बाद पाकिस्तान के कई पत्रकारों का मानना है कि बीएलए पिछले कुछ समय से जिस तरह चीनी नागरिकों को निशाना बना रहा है और आए दिन उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहा है उससे साफ़ हो गया है कि इस संगठन ने पाकिस्तान में चीनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ये लोग एक और बात भी बताते हैं. इनके मुताबिक बीएलए पहले काफी छोटे हमले किया करता था और इसीलिए यह कभी पाक सरकार की ज्यादा परेशानी नहीं बढ़ा सका. लेकिन अब देखने में आया है कि यह संगठन पहले से बड़े और आत्मघाती हमलों को भी अंजाम दे रहा है. गौर करें तो हाल के महीनों में उसका हर हमला पहले वाले से ज्यादा बड़ा हुआ है. इन जानकारों के मुताबिक इससे साफ़ है कि बीएलए की ताकत भी पहले से कई गुना बढ़ी है और इसी लिहाज पाकिस्तान के लिए खतरा भी बढ़ गया है.