लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच सियासी बयानबाजी का स्तर गिरता जा रहा है. ताजा मामले में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादित बयान दिया है. उन्होंने यह बयान राजस्थान के अलवर में एक दलित महिला से हुए सामूहिक बलात्कार के सिलसिले में दिया है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने जब अपनी पत्नी को राजनीतिक लाभ के लिए छोड़ दिया तो वे किसी और की बहन और पत्नी का सम्मान कैसे कर सकते हैं.

मायावती यहीं नहीं रुकीं. उन्होंने कहा कि भाजपा में विवाहित महिलाएं अपने पतियों को नरेंद्र मोदी के नजदीक जाते देखकर घबराती हैं कि कहीं प्रधानमंत्री उन्हें भी उनके पति से अलग न करवा दें. बसपा सुप्रीमो ने कहा कि नरेंद्र मोदी अलवर मामले में राजनीतिक लाभ के लिए घृणास्पद राजनीति करने की कोशिश में हैं. उनका यह भी कहना था कि इस मामले में नसीहत देने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी पार्टी के गिरेबान में झांक लेना चाहिए जिसकी सत्ता वाले राज्यों में दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार चरम पर है.

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को लेकर मायावती पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि इस घटना के बाद भी बसपा सुप्रीमो ने राज्य की कांग्रेस सरकार से अब तक अपना समर्थन वापस क्यों नहीं लिया है. 26 अप्रैल को हुई इस घटना में राजस्थान पुलिस पर लापरवाही का आरोप लग रहा है. कहा जा रहा है कि उसने एफआईआर दर्ज करने से लेकर कार्रवाई करने तक हर मामले में देर लगाई. उधर, मायावती के इस बयान पर भाजपा की प्रतिक्रिया भी आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऐसे बयान देने वालीं मायावती सार्वजनिक जीवन में रहने लायक नहीं हैं.