कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा द्वारा साल 1984 के सिख दंगों को लेकर दिए गए बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेसी पूर्वजों के नाम पर वोट मांग रहे हैं. उनसे पूर्वजों के समय हुए कामों का हिसाब मांगे तो बोलते हैं...हुआ तो हुआ. अब जनता महामिलावटी लोगों से कह रही है कि अब बहुत हुआ.’ प्रधानमंत्री के इस बयान को अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा कि उन्होंने सैम पित्रौदा से अपने बयान को लेकर सार्वजनिक माफी मांगने को कहा था. बीते हफ्ते सैम पित्रोदा से जब सिख दंगों को लेकर सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था, ‘हुआ तो हुआ.’

पबजी की लत ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सीआरपीएफ के जवानों की नींद उड़ाई

वीडियो गेम पबजी की लत ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की भी नींद उड़ा दी है. इन जवानों के बीच इसकी वजह से आपसी संवाद तक बंद हो गया है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक इस स्थिति को देखते हुए सीआरपीएफ-बिहार रेंज ने सभी उपमहानिरीक्षकों (डीआइजी) को पत्र लिखकर जवानों के मोबाइल से पबजी को हटाने (डिलीट) का फरमान जारी किया है. वहीं, छत्तीसगढ़ में भी इस तरह की तैयारी चल रही है. सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो पबजी की वजह से नक्सल विरोधी अभियान में दिक्कत आ रही है. वहीं, सीआरपीएफ के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) कुलदीप सिंह ने बताया कि केंद्रीय स्तर पर अब तक पबजी को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है.

चुनाव के बीच जदयू ने फिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की

19 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण से पहले जदयू ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को एक बार फिर उठाया है. द हिंदू की मानें तो पार्टी के महासचिव केसी त्यागी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे कम से कम 15 सीटों पर जदयू की जीत सुनिश्चित करें, जिससे इस मांग को एक बार फिर परवान चढ़ाया जा सके. नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू बिहार की 40 में से 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने अब ‘राष्ट्रवाद’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व की जगह नीतीश सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों पर अपना चुनावी अभियान केंद्रित कर लिया है. हालांकि, जदयू अध्यक्ष ने अब तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. वहीं, भाजपा ने कहा है कि चुनाव के बीच में इस तरह की मांग को नीतीश कुमार द्वारा तुरंत खारिज किया जाना चाहिए.

योग्यता परीक्षा में किसी तरह का आरक्षण नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि योग्यता (क्वालिफाइंग) परीक्षा में किसी तरह का आरक्षण नहीं हो सकता है. उसके मुताबि किसी भी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नामांकन के वक्त ही लागू होगा. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सी-टेट)-2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर तबके के हैं और सी-टेट की परीक्षा में बैठ रहे हैं. याचिकाकर्ताओं ने इसे मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया.

चुनावी नतीजे घोषित होने से पहले ममता बनर्जी का विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने से इनकार

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 23 मई को घोषित होने वाले लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे से पहले विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है. वहीं, बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है. अमर उजाला के पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर के मुताबिक ममता बनर्जी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से कहा कि वे नतीजे आए बिना इस बैठक में नहीं आएंगी. दूसरी ओर एनसीपी, द्रमुक, राजद और जेडीएस सहित कई दल इस बैठक मे शामिल होने के लिए तैयार हैं. बताया जाता है कि कांग्रेस के नेतृत्व में प्रस्तावित इस बैठक में विपक्षी दलों के बीच एकजुटता बनाने की रणनीति है.

गायब बच्चों को ढूंढने में दिल्ली पुलिस की विफलता बढ़ी

दिल्ली में गायब हुए बच्चों को तलाश करने में पुलिस की विफलता लगातार बढ़ती जा रही है. हिन्दुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक लापता बच्चों को ढूंढ़ने का प्रतिशत बीते 10 वर्षों में करीब 45 फीसदी घट गया है. साल 2008 में दिल्ली पुलिस गायब हुए बच्चों में से 95 फीसदी को ढूंढ़ निकालने में सफल होती थी. वहीं, 2019 में अब तक यह आंकड़ा 51 फीसदी तक पहुंच गया है. बीते साल यह 69 फीसदी रहा था. वहीं, राज्यसभा में पेश एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2015 से 2018 के बीच 27,356 बच्चे दिल्ली से लापता हुए हैं. इनमें से करीब 8,000 बच्चों के बारे में अब तक कोई खबर नहीं है. दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि गायब हुए बच्चों को ढूंढने की दर को घटा हुआ नहीं मानना चाहिए. दिल्ली पुलिस की मानें तो जैसे-जैसे बच्चे बरामद होते हैं या फिर वे खुद लौट आते हैं तो उसी क्रम में इस आंकड़े को अपडेट किया जाता है. साथ ही, इसका प्रतिशत भी बढ़ता जाता है.