हरियाणा के फरीदाबाद स्थित मतदान केंद्र में भाजपा के एक पोलिंग एजेंट द्वारा मतदान को प्रभावित करने के मामले में नई जानकारियां सामने आ रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि 12 मई को बूथ नंबर 88 में दलित मतदाताओं के वोट प्रभावित करने की योजना थी. इस घटना के बाद असावटी गांव की कई दलित महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उस दिन उनका मताधिकार उनसे छीन लिया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक 23 साल की विवेचना 12 मई को मतदान के लिए पोलिंग बूथ पहुंची थीं. वे बसपा को वोट देने आई थीं. करीब एक घंटे तक वोटिंग लाइन में खड़े रहने के बाद जब उनके वोट देने का वक्त आया तो वे ऐसा नहीं कर पाईं. उनके वोट देने से पहले भाजपा एजेंट गिरिराज ने भाजपा का बटन दबा दिया. विवेचना ने अखबार को बताया, ‘मैं हैरान रह गई थी. मैंने उससे पूछा था कि उसने मेरा वोट क्यों किया. उसने कहा कि मतदान हो गया है. यह कह कर वह वापस टेबल पर बैठ गया. मैंने बसपा का बटन दोबारा दबाया लेकिन वोट पहले ही जा चुका था.’

विवेचना की तरह एक और दलित महिला शोभा ने बताया कि गिरिराज ने उनसे कहा था कि वे भाजपा को वोट दें. शोभा ने कहा, ‘मैंने उससे कहा कि वह कौन होता है मुझे बताने वाला कि किसे वोट देना है. मैं जिसे चाहूं उसे वोट दूंगी. मैंने हाथी वाला बटन दबाया और बाहर आ गई. बाद में मैंने सुना कि और भी लोगों के साथ ऐसा हुआ था.’ वहीं, एक और दलित मतदाता विद्या ने कहा कि उनका मताधिकार उस दिन ‘छीन’ लिया गया. वे यह आरोप भी लगाती हैं कि उनके समुदाय पर पहले से राजनीतिक दबाव था. विद्या ने कहा, ‘हम सालों से बसपा को वोट कर रहे हैं. हम पर हमेशा ही दबाव रहता है. लेकिन इस तरह की चीज पहले नहीं हुई. बूथ पर मौजूद लोगों को पहले से पता था कि कौन किसे वोट करेगा. इसलिए उन्होंने हमें निशाना बनाया. मेरी भाभी के साथ भी उन्होंने ऐसा ही किया.’

इस घटना का पता चलने के बाद इस मतदान केंद्र के और भी कई वीडियो सामने आए हैं. इनमें कई पुरुष मतदाताओं को कथित रूप से प्रभावित करते दिख रहे हैं. इनमें असावटी गांव का सरपंच भी कथित रूप से शामिल है. उनके अलावा विजय रावत नाम का एक और व्यक्ति भी वीडियो में मतदाताओं को प्रभावित करते दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक वह स्थानीय युवा राजपूताना संगठन का अध्यक्ष है और भाजपा से जुड़ा है. विद्या ने आरोप लगाया है कि उनका वोट विजय रावत ने दिया था. उनके मुताबिक उन्होंने पहले इस बारे शिकायत इसलिए नहीं क्योंकि वे कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती थीं.