भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने बुधवार सुबह मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘अगर मुझे सीआरपीएफ (केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल) की सुरक्षा न मिली होती तो मैं पश्चिम बंगाल से ज़िंदा वापस नहीं लौट पाता.’ वे मंगलवार को कोलकाता में अपने रोडशो के दौरान भाजपा-टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर टिप्पणी कर रहे थे.

अमित शाह ने यह भी कहा, ‘टीएमसी कार्यकर्ताओं ने 19वीं सदी के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी और आरोप भाजपा पर लगाया. रोडशो के दौरान जो हुआ वह हिंसा नहीं थी. वह स्पष्ट रूप से हमला था. हम पूरे देश में रैलियां कर रहे हैं. लेकिन बंगाल में ही हमारी रैलियों के दौरान हिंसा हो रही है. क्यों? टीएमसी की वज़ह से. हालांकि इसके बावज़ूद बंगाल में इस वक़्त राष्ट्रपति शासन लगाने की ज़रूरत मैं नहीं समझता. वहां की जनता ख़ुद ही ममता बनर्जी की सरकार को गद्दी से उतार देगी.’

ख़बरों की मानें तो इस घटना को लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग से भी शिकायत की है. इसमें मांग की है कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को आख़िरी चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार से रोका जाए. इधर एक अन्य ख़बर के मुताबिक मंगलवार को कोलकाता हिंसा के मद्देनज़र पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक रैली रद्द कर दी है. हालांकि इसके बावज़ूद अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ से कहा है कि वे इस रैली के साथ बंगाल में अपनी सभी रैलियां करें.