भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक और खराब खबर है. खस्ताहाल जेट एयरवेज के उबरने की अब तक कोई साफ सूरत नहीं दिख रही है और इसी बीच इंडिगो के दोनों प्रमोटर्स के बीच मतभेद बढ़ने की सूचनायें आ रही हैं. इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक कंपनी के दोनों संस्थापकों ने इस विवाद को लेकर कानूनी फर्मों से संपर्क साधा है. इस खबर ने विमानन सेक्टर और निवेशकों की बेचैनी बढ़ा दी है. इसके चलते कंपनी के शेयर आठ फीसद तक टूट गए.

वैसे ही भारतीय विमानन सेक्टर इन दिनों काफी दबाव में दिख रहा है. किंगफिशर के बाद, जेट एयरवेज की असफलता की कहानियां सबके सामने हैं. सरकार द्वारा नियंत्रित एयर इंडिया भी जैसे-तैसे चल रही है. जाहिर है, ऐसे में इस सेक्टर की अगुवा इंडिगो से आई खबर सरकार से लेकर निवेशकों तक को परेशान करने वाली है.

हालांकि, भारत की सबसे सफल एयरलाइंस और घरेलू उड़ानों में करीब 46 फीसदी की भारी हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो के मालिकान राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया के बीच मतभेद की खबरों का स्वरूप कुछ अलग है. जानकारों का कहना है कि इंडिगो के हिस्सेदारों का विवाद कुछ अन्य मामलों से जुड़ा है और फिलहाल उसमें किसी आर्थिक संकट की आहट नहीं है. लेकिन वे यह भी मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ा तो इंडिगो बतौर एयरलाइंस भी इस समस्या से जूझेगी, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता.

इंडिगो के मालिकानों के बीच तनातनी की खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है कि इंडिगो को विमानन क्षेत्र में ऐसी कंपनी के तौर पर देखा जाता है, जिसकी बैलेंसशीट सबसे ज्यादा मजबूत है. टाटा-विस्तारा और अन्य उभरती एयरलाइंस अपनी रणनीति इसी आधार पर बना रहे थे कि कैसे इंडिगो को टक्कर दी जा सकी. जेट की हिस्सेदारी की नीलामी प्रक्रिया में कंपनियों की दिलचस्पी को इसी आधार पर विश्लेषित किया जा रहा था कि अगर एतिहाद या टाटा इसे खरीदते हैं तो वह इंडिगो को टक्कर दे सकते हैं. लेकिन इंडिगो के दोनों प्रमुख हिस्सेदारों में विवाद के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में जाने की खबरों ने सबको हैरान कर दिया है.

सवाल उठता है कि भारत की सबसे सफलतम एयलाइन के दोनों प्रमुख हिस्सेदारों के बीच झगड़ा क्या है. राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया ने 2006 में इंडिगो की स्थापना की थी. मौजूदा समय में राकेश गंगवाल के पास इंडिगो के 38 और राहुल भाटिया के पास 37 फीसदी शेयर हैं. अमेरिकी नागरिकता रखने वाले राकेश गंगवाल दुनिया में विमानन क्षेत्र के बड़े जानकारों में एक माने जाते हैं. वे एयर फ्रांस और अमेरिकी एयरवेज में उच्च पदों पर रह चुके हैं. दूसरी तरफ, राहुल भाटिया भारत में रहते हैं और यहीं से कंपनी का संचालन देखते हैं. उन्हें भारतीय विमानन क्षेत्र के नियम-कानूनों और मिजाज का अच्छा जानकार माना जाता है. इन दोनों के बीच ताजा विवाद की जो वजह बताई जा रही है, वह मुख्य रूप से कंपनी पर नियंत्रण स्थापित करने और उसकी भविष्य की योजनाओं को लेकर है.

खबरों के मुताबिक राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया के बीच मतभेद कंपनी में बड़े पदों पर नियुक्तियों को लेकर शुरू हुए. इस साल की शुरुआत में बतौर कंपनी सीईओ रोनोजॉय दत्ता की नियुक्ति के बाद यह विवाद बढ़ता नजर आया. जानकारों के मुताबिक राहुल भाटिया इस नियुक्ति से खुश नहीं थे. उन्हें लगा कि इस तरह की नियुक्तियों के जरिये राकेश कंपनी के प्रबंधन पर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाह रहे हैं और अपनी टीम तैयार कर रहे हैं. इस चर्चा की शुरुआत तभी हो गई थी जब इंडिगो के अध्यक्ष आदित्य घोष और उसके बाद कंपनी के एक और उच्चाधिकारी संजय कुमार ने कंपनी से इस्तीफा दिया. जानकारों का मानना है कि इसके बाद इस तरह की शिकायतें बढ़ी कि इंडिगो में कार्य संस्कृति बदल रही है और बड़े पैमाने पर विदेशी अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है.

इसके अलावा इंडिगो के दो सबसे बड़े हिस्सेदारों में कंपनी की रणनीतियों को लेकर भी मतभेद बताए जा रहे हैं. जानकार मानते हैं कि राकेश गंगवाल इंडिगो को लेकर काफी आक्रामक रणनीति बना रहे हैं और वे वैश्विक स्तर पर एक बजट एयरलाइन के बारे में सोच रहे हैं. इंडिगो ने कुछ दिन पहले बड़े पैमाने पर नए विमानों का आर्डर भी दिया है, जिसे गंगवाल की विस्तार की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. उधर, राहुल भाटिया के बारे में माना जाता है कि वे भारतीय विमानन सेक्टर के अस्थिर हालात को देखते हुए इस बारे में सतर्क दृष्टिकोण रखते हैं और इसके चलते वे बहुत आक्रामक विस्तार योजनाओं के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं.

राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया के बीच आ रहे मतभेदों के बारे में फिलहाल यही खबरें छन कर आ रही हैं. मतभेद कितने गंभीर हैं, इस बारे में सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है. विमानन सेक्टर के कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि इंडिगो में आई यह समस्या वास्तविक कम और प्रमोटर्स के बीच अहं का टकराव ज्यादा है. 15 मई तक के आंकड़ों के मुताबिक, इंडिगो का बाजार पूंजीकरण 61,833 करोड़ रु था. अगर यह टकराव बढ़ता है तो जाहिर है कि यह निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाला होगा. गुरुवार को इंडिगो के शेयर आठ फीसद टूटने के साथ इसकी शुरुआत हो भी चुकी है.

हालांकि, कुछ जानकार मान रहे हैं कि कंपनी का प्रबंधन इस बात को समझता है और दोनों मालिकानों के बीच सुलह के प्रयास शुरू हो चुके हैं. हालांकि, इंडिगो प्रबंधन ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया है. उसने न तो दोनों प्रमोटर्स के झगड़े की पुष्टि की और न ही इससे इन्कार किया है.

कुल मिलाकर भारतीय विमानन सेक्टर के लिए यह खबर हताशा वाली है. किंगफिशर और जेट एयरवेज के डूबने और एयर इंडिया की खस्ता हालत के बीच इंडिगो से आ रही सूचनाओं से इस सेक्टर पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. हवाई ईंधन की बढ़ती कीमतों के साथ बढ़ते किराए ने इस पर पहले से ही दबाव बना रखा है. इंडिगो के दो बड़े हिस्सेदारों के बीच विवाद जितना बढ़ेगा, भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र भी उतना दबाव में आएगा.