तीन तलाक की पीड़ित एक मुस्लिम महिला ने इस मामले में न्याय पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है. खबरों के मुताबिक पीड़ित की अपील स्वीकार करते हुए जस्टिस इंदिरा बनर्जी और संजीव खन्ना की खंडपीठ ने इस मामले पर इसी शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है.

इससे पहले पीड़ित महिला के वकील एमएम कश्यप ने इस मामले को इसी खंडपीठ के सामने प्रस्तुत करते हुए इसकी जल्दी सुनवाई करने का आग्रह किया था. साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी दी कि पीड़ित की शादी नौ साल पहले हुई थी. लेकिन बाद में उसके पति ने उससे अतिरिक्त दहेज और एक कार की मांग की थी. वह मांग पूरी न होने पर उसके पति ने 19 मार्च को उसे घर से निकाल दिया था. इसके बाद 25 मार्च को उसने पीड़ित को तलाक का नोटिस भेज दिया था.

इस पर जस्टिस बनर्जी और संजीव खन्ना की इस खंडपीठ ने पीड़ित के वकील से सवाल किया कि दिल्ली की ही रहने वाली इस महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपील क्यों नहीं की? तो इसके जवाब में एमएम कश्यप ने कहा कि 2017 में ही सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को असंवैधानिक ठहरा चुकी है. ऐसे में पीड़ित के पति की तरफ से उसे तीन तलाक दिया जाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है.

इस दौरान पीड़ित महिला ने शीर्ष अदालत से उसे न्याय देने की गुहार लगाते हुए कहा है, ‘मुझे मेरे पति के साथ रहने की इजाजत मिलनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाऊंगी.’