महालेखाकार (एजी) की आडिट रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय में वाईफाई सेवा उपलब्ध कराने का अनुबंध रिलायंस जियो को दिए जाने पर सवाल उठाया गया है. रिपोर्ट में डाटा की गोपनीयता को लेकर चिंता जताई गई है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार यह आडिट अक्टूबर, 2017 से दिसंबर, 2018 के दौरान किया गया. इसे मुख्य चुनाव अधिकारी को साझा किया गया है और उनसे जवाब मांगा गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो को पिछले साल नवंबर में कार्यालय में बेहतर कवरेज और कनेक्टिविटी के लिए वाईफाई सेवा उपलब्ध कराने का ठेका दिया गया था. आडिट में यह तथ्य सामने आया है कि निजी कंपनी को यह अनुबंध दिए जाते समय विभागीय प्रमुख की अनुमति नहीं ली गई. रिपोर्ट कहती है कि राज्य निर्वाचन कार्यालय एक संवैधानिक निकाय है. इसमें कहा गया है कि डाटा सेवा प्रदान करने का काम निजी कंपनी को देने से डाटा की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है.

रिपोर्ट में वोटिंग कंपार्टमेंट, मतदान केंद्र में इस्तेमाल किए जाने वाले अस्थायी ढांचे की खरीद पर हुए खर्च को अनियमित बताया गया है. भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वोटिंग कम्पार्टमेंट सिर्फ स्टील ग्रे रंग में कॉरगैटिड प्लास्टिक शीट (फ्लेक्स बोर्ड) के हो सकते हैं. एजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कम्पार्टमेंट की खरीद में लाखों रुपये खर्च किए गए है जबकि ये चुनाव आयोग द्वारा तय मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं.