प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने केंद्र सरकार के अधिकारियों से कहा है कि वे जल्द से जल्द अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों में खाली पड़े पदों और उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदमों से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करें. उसके इस आदेश के बाद अधिकारी हड़बड़ी में दिख रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक पीएमओ का यह आदेश विपक्ष के उस आरोप के बाद आया जिसमें उसने नरेंद्र मोदी सरकार पर रोजगार पैदा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था. विपक्ष का कहना था कि मोदी सरकार न सिर्फ नौकरियां पैदा करने में नाकाम रही, बल्कि पहले से मौजूद पदों को भरने में भी विफल रही है. खबर के मुताबिक इसके बाद मंत्रालयों और विभागों को आंतरिक सर्कुलर जारी कर उनसे अपने-अपने यहां भरे गए पदों की जानकारी मांगी गई.

हालांकि मोदी सरकार में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री सदानंद गोड़ा ने ऐसे किसी सर्कुलर से इनकार किया है. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री चुनाव में व्यस्त हैं. मुझे नहीं लगता कि ऐसा कोई सर्कुलर है. मेरे मंत्रालय में 6,000 कर्मचारी हैं. मैंने कोई सर्कुलर नहीं देखा.’ उधर, केंद्रीय सरकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष केकेएन कुट्टी का कहना है, ‘यह सरकार पिछले पांच सालों से हमसे बात नहीं कर रही है. चुनावों की घोषणा के बाद बीती 13 अप्रैल को इस सरकार के तहत पहली बार राष्ट्रीय परिषद की बैठक की घोषणा की गई.’

खबर के मुताबिक केकेएन कुट्टी ने खाली पदों के संबंध में दो समस्याओं का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक संयुक्त प्रयास के तहत खाली पदों की संख्या के बारे में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) को नहीं बताया जा रहा और एसएससी खुद ऐसी स्थिति में नहीं है कि जरूरत के हिसाब से भर्तियां कर सके. उन्होंने कहा, ‘ज्यादातर विभागों में औसतन 40 से 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं. आयकर विभाग में 50 प्रतिशत और सीएजी में 45 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं. कई पदों को भरने की मंजूरी दी गई है, लेकिन भर्ती नहीं हुई.’

अखबार ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग मंत्री जितेंद्र सिंह से संपर्क करने की कोशिश की. अभी तक उनकी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आई है. इस बीच, अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी श्रीकुमार ने कहा, ‘बीते सालों में कुछ नहीं किया गया तो अब इसका (सर्कुलर) का क्या मतलब है? 13 अप्रैल की बैठक में भी हमने यह मुद्दा कैबिनेट सचिव के सामने उठाया था. ऐसा लगता है मानो उन्हें सत्ता वापसी पर केवल कुछ घोषणा करनी है.’