राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने लाखों घर खरीदारों को बड़ी राहत दी है. उसने एक आदेश में कहा है कि अगर बिल्डर घर देने में एक साल ज्यादा की देर करते हैं तो खरीदार अपना पैसे रीफंड ले सकते हैं.

आयोग ने दिल्ली के एक निवासी शलभ निगम की एक याचिका पर यह आदेश जारी किया है. उन्होंने 2012 में रियल एस्टेट कंपनी ऑरिस इंफ्रास्ट्रक्चर और 3सी की एक आवासीय योजना के तहत गुडगांव में करीब एक करोड़ रुपये का एक फ्लैट खरीदा था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक निगम ने कंपनी को 90 लाख रुपये का भुगतान किया था. लेकिन फ्लैट के निर्माण का काम समय पर पूरा नहीं हुआ.

समझौते के मुताबिक निगम को 36 महीनों में फ्लैट मिलना था. लेकिन बिल्डर कंपनियां ऐसा नहीं कर पाईं जिसके बाद निगम एनसीडीआरसी के पास पहुंच गए. उन्होंने आयोग से अपील की कि या तो उन्हें उनका पैसा वापस मिले या एक तय अवधि के में फ्लैट का काम पूरा किया जाए. इसके बाद आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह सितंबर, 2019 के अंत तक फ्लैट का निर्माण पूरा कर उसे खरीदार के हवाले करे.

इसके अलावा आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया कि उसे फ्लैट बनने में जितनी देर हुई है, उस हिसाब से खरीदार को कुल जमा राशि पर छह प्रतिशत सालाना की दर से राहत देनी होगी. और अगर तय समयसीमा के अंदर फ्लैट तैयार नहीं होता तो दस प्रतिशत ब्याज के साथ रिफंड करना होगा.