महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे के मामले में भारतीय जनता पार्टी की नेता प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान का मामला शांत नहीं हो रहा है. भाजपा ने इस बयान से अपने आप को अलग करते हुए शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जो गोडसे के बारे में जो प्रज्ञा ठाकुर ने कहा वह पार्टी की लाइन नहीं है. इसके साथ प्रज्ञा ठाकुर ने भी अपना रुख़ बदलते हुए कहा- जो पार्टी की लाइन है, वही उनकी है.

इस मामले में ख़ुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने लिखा, ‘विगत दो दिनों में अनंतकुमार हेगड़े, प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलिन कटील के जो बयान आए वो उनके निजी बयान हैं. उन बयानों से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं है. इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफ़ी भी मांगी है. फिर भी सार्वजनिक जीवन तथा भारतीय जनता पार्टी की गरिमा और विचारधारा के विपरीत इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लेकर तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने का निर्णय किया है.’

बताया जाता है कि अमित शाह के ट्वीट के बाद भाजपा की अनुशासन समिति ने तीनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है. उन सभी से 10 दिन के भीतर ज़वाब देने को कहा गया है. ग़ौरतलब है कि भाेपाल से भाजपा की प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ बताया था. हालांकि अब उनका कहना है कि इस मामले में पार्टी की जो लाइन है वही उनकी भी है. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘मैंने जो कहा वे मेरे निजी विचार थे. मेरा इरादा किसी की भावनाओं काे ठेस पहुंचाने का नहीं था. मेरे बयान को मीडिया ने तोड़-मरोड़कर पेश किया था.’

ग़ौर करने की बात यह भी है कि प्रज्ञा ठाकुर के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक भाजपा के नेता अनंत कुमार हेगड़े ने भी नाथूराम गोडसे के समर्थन में ट्वीट किया था. जबकि कर्नाटक के एक अन्य भाजपा नेता ने नलिन कतील ने कहा था, ‘गोडसे ने एक को मारा. कसाब ने 72 को और राजीव गांधी ने 17,000 को. आप तय करें ज़्यादा क्रूर कौन था?’ हालांकि बाद में इन दोनों नेताओं ने भी अपने बयानों से पल्ला झाड़ लिया था. इस पर माफ़ी मांगते हुए सफाई भी दे दी थी.