बिहार की राजधानी पटना की निवासी और जन्म से सिर से आपस में जुड़ी युवतियों सबाह और फराह को दो अलग-अलग व्यक्तियों के तौर पर मतदान का अधिकार दिया गया है. सबाह और फराह आपस में जुड़ी जुड़वा हैं जो शहर के समनपुरा क्षेत्र में रहती हैं. अब ये दोनों बहनें रविवार को अपना वोट अपनी-अपनी पसंद से डालेंगी. 2015 के विधानसभा चुनाव में दोनों के नाम एक ही मतदाता पहचानपत्र पर थे और इसलिए उनका एक ही वोट माना गया था.

पटना साहिब सीट पर अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से है.

शनिवार को पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने पीटीआई को बताया है कि इन जुड़वा बहनों को इनकी शारीरिक स्थिति के चलते इनकी अलग-अलग पहचान से वंचित नहीं किया जा सकता. कुमार रवि के मुताबिक, ‘इनका दिमाग अलग-अलग है, अलग-अलग विचार और पसंद हैं. इसलिए अब इन्हें अलग-अलग मतदाता पहचानपत्र जारी किए गए हैं और इन दोनों को बारी-बारी से वोट डालने की इजाजत मिलेगी.’

लेकिन 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के समय इनका एक ही वोट क्यों माना गया था, इस सवाल पर जिलाधिकारी ने बताया कि मतदान गोपनीय होना चाहिए और जब कोई मतदान कर रहा हो तो वहां कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं हो सकता. चूंकि मतदान के समय ये दोनों एक साथ ही रहतीं इसलिए इनका एक ही वोट माना गया था. हालांकि इन युवतियों के सिर इस तरह से आपस में जुड़े हैं कि ये हमेशा विपरीत दिशा में देखती हैं. कुमार रवि के मुताबिक यह भी एक दलील है जिसके आधार पर इन्हें स्वतंत्र मताधिकार दिए जाने पर कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

इन जुड़वा लड़कियों की कहानी हाल ही में चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर हैशटैग ‘चुनाव की कहानियां’ के जरिए साझा भी की थी.

अतीत में इन दोनों बहनों को सर्जरी के जरिये अलग करने के बहुत प्रयास किये गये लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे जटिल आपरेशन बताया था. बाद में उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को दोनों बहनों को पांच हजार रुपये महीना देने का निर्देश दिया था जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया था.