दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मोहल्ला क्लिनिक’ योजना अब राष्ट्रीय स्तर स्वीकारी जा रही है. साल 2015 में दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में दो कमरों वाले पोर्टाकैबिन से शुरू हुई इस योजना को आज देश के कई राज्य प्रमुखता से अपना रहे हैं. इनमें तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक मोहल्ला क्लिनिक से प्रभावित झारखंड की सरकार ने एलान किया है कि वह अपने यहां की शहरी बस्तियों में इस तरह के क्लिनिक शुरू करेगी. रिपोर्ट की मानें तो यहां भी इस योजना का नाम ‘मोहल्ला क्लिनिक’ ही रहेगा. इसके तहत झारखंड सरकार लोगों को मुफ्त इलाज व अन्य चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराएगी. राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण सचिव मदन कुलकर्णी ने बताया, ‘आचार संहिता खत्म होने के बाद इस परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा. हमने अपने शहर के हिसाब से इसे तैयार किया है लेकिन, इसका विचार दिल्ली से आया. हमारे ज्यादातर क्लिनिक कमोबेश दिल्ली (के क्लिनिक) जैसे होंगे.’

इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी अधिकारी अपने यहां की बस्तियों में मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवा शुरू करने की कोशिश में हैं. राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक भूपेंद्र कुमार कहते हैं, ‘शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं है. लेकिन हम बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए भी समान सुविधा चाहते हैं. दिल्ली में जिस तरह मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है, उससे कई मरीज इन क्लिनिकों को लेकर प्रोत्साहित हो रहे हैं. हम अपने राज्य की जरूरत के हिसाब से इस परियोजना में सुधार कर सकते हैं.’

उधर, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के लिए काम करने वाले विशेष अधिकारी शलीन मित्रा ने कहा कि कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में कुछ क्लिनिकों का दौरा किया है. उनके मुताबिक इन राज्यों ने इस मॉडल को अपनाने को लेकर बातचीत शुरू की है.

वहीं, दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिकों में सुविधाएं बढ़ाने की कवायद चल रही है. सरकार ने इस साल इसके लिए 375 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. अगले कुछ सालों में यहां किस तरह की सुविधाएं होंगी, इसे लेकर दिल्ली सरकार के एक प्रमुख अधिकारी और डॉक्टर शल्य कामरा ने कहा, ‘हम जल्दी ही इन क्लिनिकों में प्रसवपूर्व जांच और प्रतिरक्षण संबंधी सुविधाएं शुरू करने जा रहे हैं. हमारा मॉडल इंसेंटिव आधारित है जिसके तहत डॉक्टरों को हरेक मरीज को देखने के हिसाब से पैसा मिलता है. यह आर्थिक रूप से समर्थ है जो बिना किसी इंतजार के मूल (स्वास्थ्य) सेवा प्रदान करता है.’