पश्चिम बंगाल के आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाई है. इसमें उन्होंने अपनी ग़िरफ़्तारी से पूर्व अदालत द्वारा दी गई मोहलत बढ़ाने की मांग की है.

राजीव कुमार के वकील ने शीर्ष अदालत की जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगुवाई वाली अवकाशकालीन बेंच को बताया कि उन्हें उनकी ग़िरफ़्तारी से पहले सात दिन की मोहलत दी गई थी. इस अवधि में उनसे अपेक्षा की गई थी कि वे चाहें तो सक्षम अदालत से कानूनी राहत ले सकते हैं. लेकिन कोलकाता की अदालतों में वकीलों की हड़ताल चल रही है. इसकी वज़ह से मोहलत के चार दिन निकल जाने के बावज़ूद वे अब तक सक्षम अदालत में याचिका दायर नहीं कर पाए हैं. लिहाज़ा उन्हें दी गई मोहलत बढ़ाई जाए.

राजीव कुमार के वकील ने मामले की तुरंत सुनवाई की भी मांग की. लेकिन शीर्ष अदालत की बेंच ने साफ कहा कि मामले को कोर्ट रजिस्ट्री में दर्ज़ कराएं. वहां से उचित बेंच के पास मामला भेजने के लिए सूचीबद्ध कर दिया जाएगा. ग़ौरतलब है कि काेलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को सीबीआई शारदा चिटफंड घोटाले की जांच के सिलसिले में हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है. लेकिन उनकी ग़िरफ़्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई थी. यह रोक बीती 17 मई को हटा ली गई है.

अदालत ने राजीव कुमार की ग़िरफ़्तारी से रोक हटाते हुए ही उन्हें सात दिन का वक़्त दिया था, जिसे वे बढ़वाना चाहते हैं. यहां याद दिला दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़ास अफ़सर राजीव कुमार पूर्व में उस जांच दल के प्रमुख रहे हैं जिसने शारदा चिटफंड घोटाले की जांच की थी. बाद में यह मामला सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के पास आ गया. अब सीबीआई उनसे उसी जांच से संबंधित सबूतों-दस्तावेज़ आदि के बाताल्लुक़ पूछताछ करना चाहती है. इसी को लेकर गतिरोध बना हुआ है.