लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम घोषित होने से पहले आए एक्ज़िट पोलों से भाजपा और नरेंद्र मोदी के समर्थकों के बीच ख़ुशी की लहर दौड़ गई है. रविवार को अलग-अलग न्यूज़ चैनलों ने सर्वे कराने वाली अलग-अलग एजेंसियों के हवाले से चुनाव परिणाम से जुड़े ‘सबसे सटीक’ अनुमान दिखाए और लगभग सभी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार की सत्ता वापसी की प्रबल संभावना जताई. कुछ ने कहा कि भाजपा अकेले दम पर बहुमत में आएगी और एनडीए सहयोगियों के साथ मिल कर ‘350 से 365’ सीटों वाली बेहद मज़बूत सरकार बनाएगी. वहीं, कुछ के मुताबिक़ भाजपा 272 से नीचे रहेगी, लेकिन सहयोगी दलों की मदद से आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी. जिन न्यूज़ चैनलों ने भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने की बात कही है, उनमें ज़ी न्यूज़, टाइम्स नाउ, रिपब्लिक भारत, इंडिया टुडे-आजतक, न्यूज़ 24, इंडिया टीवी, न्यूज़ 18 जैसे बड़े चैनल शामिल हैं.

लेकिन भाजपा को ‘बहुमत’ के साथ बहुमत दे रहे इन चैनलों को न्यूज़एक्स-नेता का एक्ज़िट पोल चुनौती देता है. इस एक्ज़िट पोल की मानें तो भाजपा अपने दम पर केवल 202 सीट लाएगी, और एनडीए के साथियों के सहयोग से भी वह 242 सीटों से आगे नहीं जा पाएगी. यानी सत्ता वापसी के लिए उसे 30 और सीटों की ज़रूरत होगी. फ़िलहाल बाक़ी चैनलों के शोर में इस चैनल के पोल की चर्चा ज़्यादा नहीं हो रही है. लेकिन लोकसभा चुनाव के अंतिम दौर की कुछ घटनाओं पर ग़ौर करें तो न्यूज़एक्स का एक्ज़िट पोल ध्यान खींचता है.

बहुमत को लेकर भाजपा-एनडीए के अविश्वास की झलक

न्यूज़एक्स का पोल सबसे पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के हालिया बयानों की याद दिलाता है. इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि 2014 के चुनावों के बाद देश ने एक बहुत कमज़ोर विपक्ष को देखा और इस वजह से उन्हें (भाजपा) भी संसद में मज़ा नहीं आया. यह कहते हुए राम माधव ने कहा, ‘कम से कम इस बार संसद में मज़ा तो आए.’

सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय महासचिव के इस बयान को बहुमत को लेकर भाजपा के कथित अविश्वास से जोड़कर देखा गया. यह राय और मज़बूत हुई जब एक इंटरव्यू में राम माधव ने कहा, ‘अगर हमें 271 सीटें मिल जाएं तो हम बहुत ख़ुश हो जाएंगे. एनडीए के साथ हम आसानी से बहुमत में आ जाएंगे.’ माधव ने सत्ता-विरोधी लहर का ज़िक्र करते हुए कहा, ‘एक राजनेता के तौर पर हमें यह ज़रूर याद रखना चाहिए, कि पिछली बार हमने जो हासिल किया, शायद सत्ता-विरोधी लहर की वजह से उसे न दोहरा पाएं.’

भाजपा इस चुनाव में पिछली बार जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी, यह बात कहने वाले राम माधव भाजपा पक्ष के अकेले नेता नहीं हैं. चुनाव के दौरान एनडीए के प्रमुख सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के नेता नरेश गुजराल ने भी संकेत दिया था कि उत्तर प्रदेश में (सपा-बसपा के) महागठबंधन की वजह से इस बार भाजपा बहुमत के नीचे जा सकती है. उनके अलावा महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भी ऐसे ही संकेत दिए थे. पार्टी के नेता संजय राउत ने कहा था कि भाजपा का अपने दम पर सरकार बनाना मुश्किल लगता है.

वहीं, भाजपा के बहुमत में आने पर सबसे बड़ा सवाल तब लग गया जब ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा गठबंधन चलाने की कला जानती है. बीती 11 मई को पार्टी ने प्रधानमंत्री के हवाले से अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘भाजपा गठबंधन चलाने की कला जानती है. संगठन के लिए काम करने के दौरान मैंने ख़ुद अलग-अलग राज्यों में भाजपा के गठबंधन सहयोगियों के साथ काम किया है. उस समय हमारी पार्टी के पास श्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत थी जिन्होंने अपने कार्यकाल में सबसे बेहतरीन गठबंधन चलाया.’

देश के सियासी माहौल का अंदाज़ा लगाने के लिए राजनीतिक दलों का अपना तरीका होता है. उसी आधार पर वे चुनावी दांव (जैसे गठबंधन) खेलते हैं और दावे करते हैं. ऐसे में न्यूज़एक्स को छोड़ कर और बाक़ी सभी चैनलों के पोल देख कर सवाल उठता है कि क्या राम माधव को भाजपा को लेकर जनता के रुख़ का अंदाज़ा नहीं था? क्या नरेश गुजराल और संजय राउत को भी यह भान नहींं था कि भाजपा अपने दम पर आसानी से सरकार बना लेगी? और पूरे चुनाव में गठबंधन को कमज़ोर सरकार का आधार बताने वाले नरेंद्र मोदी इसे ‘कला’ क्यों बताने लगे? कई हैं जो मानते हैं कि इन सवालों के जवाब की एक झलक न्यूज़एक्स के पोल में दिखती है.

एबीपी ने भी एनडीए को बहुमत से दूर दिखाया था

न्यूज़एक्स के एक्ज़िट पोल के ध्यान खींचने की एक और वजह है. रविवार को दिखाए जा रहे एक्ज़िट पोलों में भाजपा या एनडीए को सत्ता से दूर दिखाने वाला यह अकेला पोल नहीं था. एक बड़े और प्रमुख हिंदी न्यूज़ चैनल एबीपी न्यूज़ पर भी भाजपा-एनडीए को कुल 267 सीटें मिलती दिखाई गई थीं. लेकिन बाद में चैनल ने कांग्रेस और अन्य की कुल दस सीटें कम करके एनडीए के पाले में दिखा दीं. इस तरह उसे 277 सीटें मिल गईं जो बहुमत की संख्या से पांच सीट ज़्यादा है. लेकिन न्यूज़एक्स अपने पोल पर बरक़रार रहा. अगर गुरुवार को असल चुनावी नतीजे कुछ और निकले तो उसका पोल चर्चा में आ सकता है. वहीं, बाक़ी चैनलों के ‘पोल में झोल’ के आरोप लगाए जा सकते हैं.