अमेरिका के प्रख्यात भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में 23 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद गठित होने वाली सरकार को आर्थिक क्षेत्र में अहम फैसले करने होंगे. विदेशी संबंधों पर परिषद की सदस्य एलिसा आयर्स ने पीटीआई-भाषा से कहा कि रक्षा क्षेत्र के मामले में हर सरकार में भारत और अमेरिका के संबंध बेहतर हुए हैं, लेकिन व्यापार एवं आर्थिक मोर्चे पर तनाव बढ़ा है. इसी को लेकर एलिसा ने कहा, ‘अगली सरकार किसी की भी बने, एक बात तय है कि भारत को विदेश नीति के संबंध में, खासकर आर्थिक क्षेत्र में अहम फैसले करने होंगे.’

एक अन्य विशेषज्ञ एशले टेलिस ने अपने एक लेख में लिखा कि एक्जिट पोल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा चुने जाने का पूर्वानुमान लगाया है, जिन्हें भारत में ही नहीं, बल्कि उससे आगे भी गंभीर बाह्य चुनौतियों का सामना करना होगा. टेलिस ने कहा, ‘यदि भारत को आगामी दशकों में बड़ी ताकत बनने की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना है तो अगली सरकार को घरेलू स्तर पर आर्थिक सुधार तेज करने होंगे, भारत की संस्थाओं को मजबूत करना होगा, उसके संवैधानिक चरित्र को बचाकर रखना होगा और देश के आंतरिक सामंजस्य को बरकरार रखना होगा. ये सभी हालिया वर्षों में बुरी तरह संघर्ष कर रहे हैं.’

इसके अलावा ‘जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज’ में एसोसिएट प्रोफेसर जोशुआ व्हाइट ने भी कहा कि अगली सरकार के लिए सबसे अहम काम आर्थिक सुधार होंगे. वहीं, ‘न्यू अमेरिका’ थिंक टैंक के एक वरिष्ठ सदस्य अनीश गोयल ने कहा कि सत्ता में कोई भी आए, उसे व्यापारिक संबंधों समेत विदेश नीति संबंधी कई चुनौतियों का सामना करना होगा जो जटिल होती जा रही हैं.