तकरीबन हर एग्जिट पोल में यह दावा किया जा रहा है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की वापसी तय है. कुछ एग्जिट पोल तो ऐसे भी हैं जो भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को तकरीबन 350 सीटें दे रहे हैं. आम चुनाव के नतीजे कल यानी 23 मई को आने हैं.

लेकिन लगभग सभी एग्जिट पोलों में नरेंद्र मोदी के वापसी के दावों के बीच खुद भाजपा के अंदर एक धड़ा ऐसा है जिसे इन पोलों की विश्वसनीयता पर ही संदेह है. खास तौर पर उत्तर प्रदेश में भाजपा से संबंधित जो आंकड़े एग्जिट पोलों में दिए जा रहे हैं, उनसे पार्टी के ही कुछ नेता सहमत नहीं हैं. कई एग्जिट पोल ऐसे हैं जो भाजपा को उत्तर प्रदेश में 2014 के 71 सीटों के प्रदर्शन के आसपास पहुंचा दे रहे हैं. वह भी तब जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल मिलकर चुनाव लड़े हैं.

पार्टी के जिस धड़े को इन एग्जिट पोलों पर यकीन नहीं है, उसे यह तो लगता है कि केंद्र में भाजपा की सरकार बन रही है, लेकिन उसे यह भी लगता है कि शायद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री न बनें. इस खेमे के लोगों की मानें तो एग्जिट पोलों के दावों के उलट भाजपा को इतनी सीटें नहीं मिलेंगी कि वह अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मिलकर केंद्र में सरकार बना ले. ऐसे में पार्टी को केंद्र में अपनी सरकार बनाने के लिए नए सहयोगी दलों की जरूरत पड़ेगी. इन्हें यह भी लग रहा है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर नए सहयोगियों को जुटाना बेहद कठिन काम है.

ऐसे में इस खेमे का मानना है कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री बन सकते हैं क्योंकि उनके नाम पर नए सहयोगियों को जुटाना अपेक्षाकृत आसान होगा. इन लोगों के मुताबिक इसकी वजह यह है कि राजनाथ सिंह के भाजपा के बाहर दूसरे दलों के नेताओं के साथ भी अच्छे संबंध हैं.

मौजूदा सहयोगियों के बारे में भी राजनाथ सिंह के समर्थक यह कह रहे हैं कि ये पुराने सहयोगी भी नरेंद्र मोदी के मुकाबले राजनाथ सिंह के साथ अधिक सहज हैं. इनका कहना है कि पांच साल तक नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उनकी सरकार में जिन सहयोगी दलों के मंत्री रहे भी हैं, उनमें भी मोदी की कार्यशैली को लेकर असंतोष है. जिस तरह नरेंद्र मोदी की सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय से मंत्रालयों को चलाने की कोशिश हुई, उससे भाजपा के मौजूदा सहयोगियों के मंत्री भी सहज नहीं रहे हैं. ऐसे में राजनाथ सिंह के समर्थकों को लगता है कि अगर कोई ऐसी स्थिति आती है कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने भर संख्या भाजपा को नहीं मिले तो ये सहयोगी राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा पर दबाव बढ़ाएंगे.

इस राय से भाजपा के अंदर वे लोग भी सहमत दिखते हैं जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कार्यशैली से सहज नहीं हैं. इन लोगों को लग रहा है कि राजनाथ सिंह सबको साथ लेकर चलने वाले नेता हैं. इन लोगों का कहना है कि जब राजनाथ सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तब भी वे कार्यकर्ताओं की बात सुनते थे और विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेताओं को तरजीह देते थे, लेकिन मोदी-शाह के दौर में यह बात नहीं रही. पार्टी के अंदर ऐसी चर्चाओं के बीच एग्जिट पोल के नतीजों को देखते हुए ऐसे नेताओं में से कोई भी सार्वजनिक तौर पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है. लेकिन पार्टी में प्रमुख नेताओं का एक खेमा ऐसा है जो जरूरत पड़ने पर राजनाथ सिंह के पक्ष में पाला बदल सकता है.

राजनाथ सिंह के प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद रखने वाले नेताओं को लगता है कि अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन सकें तो नितिन गडकरी के मुकाबले राजनाथ सिंह की दावेदारी अधिक मजबूत है. इसलिए कि प्रधानमंत्री के तौर पर नितिन गडकरी का समर्थन करने के मुकाबले राजनाथ सिंह का समर्थन करने में नरेंद्र मोदी अधिक सहज रहेंगे. इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि अगर नितिन गडकरी प्रधानमंत्री बन गए तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपनी नजदीकी की वजह से वे उसी तरह से ताकतवर बनकर उभरेंगे जिस तरह से नरेंद्र मोदी अपने पांच साल के कार्यकाल में रहे. ऐसे में मोदी-शाह के लिए आगे की राजनीतिक राह उतनी आसान नहीं रहेगी. लेकिन अगर राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री बनते हैं तो उन पर नरेंद्र मोदी अपना प्रभाव बनाए रख सकते हैं.

ये चर्चाएं किसी कोशिश में तब्दील होंगी या नहीं यह तो 23 मई को लोकसभा चुनाव परिणामों से ही तय हो पाएगा. लेकिन इतना पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि भाजपा को कम सीटें मिलें, ऐसी इच्छा न सिर्फ विपक्ष की है बल्कि खुद भाजपा के अंदर भी एक धड़ा ऐसा है जो चाहता है कि पार्टी बहुमत से थोड़ा दूर ही रहे.