एग्जिट पोल के नतीजे आने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के तमाम नेता बहुत खुश हैं. अभी से अगली सरकार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. सहयोगियों से बातचीत की जा रही है. अगले मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले लोगों के नाम भी तय होने लगे हैं. लेकिन भाजपा के सबसे बड़े नेताओं में से एक ऐसे भी हैं जो एनडीए के जीतने की संभावनाओं के बाद भी थोड़े से कुछ ज्यादा परेशान हैं.

सुनी-सुनाई है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अब केंद्रीय मंत्री बनना चाहते हैं और गृह मंत्रालय में बैठना चाहते हैं. लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह की लखनऊ सीट भाजपा के लिए हमेशा से ही बेहद सुरक्षित सीट रही है. इसलिए राजनाथ सिंह का यहां से संसद पहुंचना तय है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक करीबी मंत्री बताते हैं कि इस बात की संभावना कम है कि उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह को हटाकर गुजरात के अमित शाह को गृह मंत्री बना दिया जाए.

लेकिन अमित शाह के करीबी एक भाजपा नेता कहते हैं कि वे अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी वाले मॉडल पर चल रहे हैं. ऐसे लोग ही कहते सुनाई देते हैं कि शाह ने अपने नजदीकी लोगों को बताया कि वे गृह मंत्रालय की स्टडी करें. गुजरात के एक अनुभवी पत्रकार कहते हैं कि गुजरात में भी नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तो अमित शाह उनका गृह मंत्रालय संभालते थे. इसलिए गृह मंत्रालय का उनकी पहली पसंद होना कोई अचंभे वाली बात नहीं है. लेकिन चौकाने वाली खबर नरेंद्र मोदी के करीबी नेता बताते हैं.

चुनाव खत्म होते-होते भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मतभेद की खबरें आने लगी हैं. भाजपा पर नजर रखने वाले एक भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि बीजेपी दफ्तर की प्रेस कॉन्फरेंस को याद कीजिए. उस चालीस मिनट में जो हुआ उसने एक दरार पैदा कर दी है. इस सूत्र ने बताया कि प्रेस कॉन्फरेंस से पहले अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी. शाह ने ही उन्हें प्रेस के सामने आने के लिए मनाया और पूरी बात समझाई.

सुनी-सुनाई है कि पहले प्रधानमंत्री प्रेस कॉन्फरेंस में लंबे वक्त तक बैठना नहीं चाहते थे. फिर तय हुआ कि एक-दो सवाल लिए जाएंगे और जवाब दिया जाएगा. इसके बाद तय हुआ कि सवाल के जवाब अमित शाह ही देंगे. अब खबर आ रही है कि प्रेस वार्ता खत्म होने के बाद भाजपा के मीडिया मैनेजर परेशान दिखे और प्रधानमंत्री नाखुश. सोशल मीडिया पर जिस तरह से नरेंद्र मोदी के बारे में कमेंट किए गए. मीडिया के सामने जिस तरह से मोदी करीब 17 मिनट तक चुप बैठे रहे उस वीडियो को अलग-अलग तरीकों से वायरल किया गया. इसका असर ऊपर तक हुआ है. अब पार्टी में अदर ही अंदर प्रेस कॉन्फरेंस से जुड़ी हर बात की जांच चल रही है.

नरेंद्र मोदी के करीबी नेता कुछ और किस्सा सुनाते हैं और अमित शाह के करीबी कुछ और. मोदी के करीबी एक सूत्र की मानें तो इस प्रेस क्रॉन्फरेंस के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच बातचीत सहज तरीके से नहीं चल रही है. और इसका असर आगे भी पड़ सकता है. अगर अमित शाह गृह मंत्री बनने का सपना देख रहे हैं तो उनका यह सपना टूट सकता है. राजनाथ सिंह एक बार फिर गृह मंत्री बन सकते हैं. साथ ही यह भी तय हो चुका है कि चुनाव के बाद भाजपा का अध्यक्ष भी बदला जाएगा. हिमाचल के लाइटवेट नेता जेपी नड्डा प्रधानमंत्री की पहली पसंद हैं.

तो फिर अमित शाह भाजपा का दफ्तर छोड़ने के बाद कौन सा ताकतवर मंत्रालय संभाल सकते हैं? अभी वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं और अगर सरकार बनी तो दोबारा वही वित्त मंत्रालय को संभालेंगे इस बात की पूरी संभावना है. इसके अलावा वित्त मंत्री होने के लिए जिस तरह की योग्यता की जरूरत है वह भी अमित शाह में नहीं है. इसके बाद बड़े मंत्रालयों में बचे रक्षा और मानव संसाधन विकास मंत्रालय. और उनके बाद विदेश मंत्रालय.

रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री दोनों महिलाएं हैं. नरेंद्र मोदी बार-बार कहते हैं कि उनकी सरकार में कैबिनेट की सुरक्षा कमेटी में दो महिलाएं फैसला करती हैं, ऐसा पहली बार हुआ है. इसलिए मोदी अचानक महिला मंत्रियों की छुट्टी भी नहीं करना चाहेंगे. और वित्त मंत्रालय की तरह विदेश मंत्रालय भी एक अलग तरह की योग्यता चाहने वाला मंत्रालय है. ऐसे में बताया जाता है कि अमित शाह के मंत्रालय को लेकर ऊहापोह की स्थिति दूसरों के साथ-साथ खुद उनके दिमाग में भी हो सकती है.