पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने रफाल सौदे के बारे में अदालत को ‘जानबूझकर’ गुमराह किया. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि केंद्र ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत से जरूरी तथ्य छिपाए.

यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के 14 दिसंबर के उस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है, जिसमें केंद्र सरकार को रफाल सौदे को क्लीन चिट दी गई थी. 41 पन्ने की दलीलों में उन्होंने कहा कि सरकार ने सच को छिपाया और ऐसे तथ्यों और दस्तावेजों को लेकर झूठ फैलाया, जिनका इस मामले से सीधा संबंध था. ये तथ्य और दस्तावेज सरकार के पास उपलब्ध थे, लेकिन इन्हें अदालत से छिपाया गया.

लोकसभा चुनावों के नतीजे आने से एक दिन पहले सार्वजनिक की गईं लिखित दलीलों में उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों को गलत जानकारी देने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए क्योंकि सरकार ने झूठा बोला तथा जरूरी तथ्य छिपाए.’ ऱफाल सौदे में सरकार को क्लीन चिट देने के फैसले पर दाखिल पुनर्विचार याचिका पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गगोई की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है. यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण के अलावा आप के सांसद संजय सिंह और वकील विनीत ढांडा ने भी इस मामले में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं.