दिसंबर, 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हिंदी पट्टी के तीन महत्वपूर्ण राज्यों, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन लोकसभा चुनाव में वह इन तीनों राज्यों समेत सभी हिंदी पट्टी के राज्यों में जबर्दस्त वापसी करती दिख रही है.

ताजा रुझानों के मुताबिक मध्य प्रदेश की कुल 29 लोकसभा सीटों में से 28 पर भाजपा आगे चल रही है. कांग्रेस यहां केवल एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है. हालांकि चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक यह स्थिति हैरान करने वाली नहीं है. क्योंकि विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत कांग्रेस से ज्यादा था.

उधर, राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से 24 पर सत्तारूढ़ दल फिर कब्जा कर सकता है. कांग्रेस का यहां एक बार फिर पूरी तरह सफाया हो सकता है, क्योंकि एक मात्र शेष सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी आगे चल रही है. साथ ही, दिल्ली और हरियाणा में भी भाजपा सीटें जीतती दिख रही है.

वहीं, छत्तीसगढ़ में भी कुल 11 लोकसभा सीटों में से नौ पर भाजपा बढ़त बनाए हुए है. दो पर कांग्रेस आगे है. इससे पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जोरदार जीत दर्ज की थी. यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का इतना निराशाजनक प्रदर्शन कई जानकारों को हैरान कर गया है.

हिंदी पट्टी के एक और महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 57 सीटें भाजपा के खाते में जाती दिख रही हैं. वहीं, सपा-बसपा गठबंधन को केवल 19 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है. कांग्रेस केवल एक सीट तक सिमट सकती है. खबरों के मुताबिक यहां की अमेठी लोकसभा सीट पर स्मृति ईरानी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर बढ़त बनाए हुए हैं. अगर वे हारे तो यह कांग्रेस के संभवतः सबसे शर्मनाक बात होगी.

इसके अलावा बिहार की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है. यहां की 40 लोकसभा सीटों में से 28 पर एनडीए गठबंधन आगे चल रहा है. इनमें भाजपा अकेले 16 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. झारखंड में 14 लोकसभा सीटों में से कम से कम दस भाजपा के नाम हो सकती हैं.