नरेंद्र मोदी एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. चुनाव आयोग की तरफ़ से घोषित अंतिम परिणामों के मुताबिक उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बार 303 लोकसभा सीटें जीती हैं. पिछली बार उसने 282 लोकसभा सीटें जीती थीं. इस बार इनमें 21 सीटों का इज़ाफ़ा हुआ है. लेकिन क्या इस जीत को केवल दोबारा सत्ता में आने या सीटें बढ़ने के लिहाज़ ही देखा जाना चाहिए?

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से उनके विरोधी बार-बार उनके पूरे ‘देश का नेता’ होने पर सवाल खड़े करते रहे हैं. इसके लिए वे 2014 के चुनावी आंकड़ों के हवाला देते हैं जिसमें भाजपा को कुल मतदान के सिर्फ 31.34 प्रतिशत वोट ही मिले थे. विपक्ष का तर्क होता है कि मोदी देश के केवल 31 फीसदी मतदाताओं के ही नेता हैं, जबकि 69 प्रतिशत लोग उन्हें अपना नेता नहीं मानते.

लेकिन 2019 के चुनाव के नतीजों के बाद इस तर्क को कड़ी टक्कर मिलने वाली है. क्योंकि इस बार भाजपा की सीटों में तो वृद्धि हुई ही है, साथ ही उसके वोट प्रतिशत में भी ख़ासा और इतना इज़ाफ़ा हुआ है कि यह नरेंद्र मोदी को पूरे देश का सबसे बड़ा, लोकप्रिय और स्वीकार्य नेता साबित कर देता है. फिर भले ही उनकी राजनीति और काम करने का तरीक़ा कितना ही विवादित क्यों न रहा हो.

जनसंख्या के हिसाब से देश के दस सबसे बड़े 10 राज्य हैं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश. देश के लगभग 90 करोड़ मतदाताओं में से 52 करोड़ 21 लाख से ज़्यादा केवल इन्हीं राज्यों से हैं. पिछली बार भाजपा को इन राज्यों में औसतन 35.84 प्रतिशत वोट मिले थे और अपने सहयोगियों के साथ उसने यहां की 234 सीटें जीती थीं. इस बार इन दस राज्यों में भाजपा (एनडीए सहयोगियों के साथ) क़रीब 44 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 266 सीटें जीती हैं.

यहां उत्तर प्रदेश का ज़िक्र विशेष रूप से ज़रूरी है जहां नरेंद्र मोदी की मायावती और अखिलेश यादव जैसे बड़े और लोकप्रिय क्षेत्रीय नेताओं से सीधी टक्कर थी. चुनावी विश्लेषकों के बड़े वर्ग का दावा था कि इस बार उत्तर प्रदेश में भाजपा पिछली बार जैसा प्रदर्शन नहीं दोहरा पाएगी. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को 49.4 प्रतिशत वोट मिले हैं जो पिछली बार के 42.30 से छह प्रतिशत से ज़्यादा हैं. इसे अमित शाह की चुनावी रणनीति के साथ नरेंद्र मोदी की छवि का ही कमाल कहा जाएगा कि सपा-बसपा के बेहद मज़बूत गठबंधन से पार पाते हुए पार्टी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की है. भले ही वह पिछली बार की तरह 71 सीटें नही जीत पाई लेकिन माया-अखिलेश के एक होने की वजह से उसका यह प्रदर्शन पिछली बार से भी अच्छा माना जा सकता है. कई जानकारों का कहना है कि नरेंद्र मोदी की वजह से ही भाजपा उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरण को तोड़ पाई.

वहीं, पूर्वोत्तर में भी भाजपा सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी है और ‘जनता के नेता’ के रूप में नरेंद्र मोदी की छवि और बड़ी हुई है. पिछले आम चुनाव में भाजपा को सभी पूर्वोत्तर राज्यों में केवल आठ सीटें मिली थीं. जबकि इस बार उसने यहां की 14 सीटों पर क़ब्ज़ा किया है. 2014 में असम में भाजपा को 36.50 प्रतिशत, मणिपुर में 11.90, मेघालय में 8.90 और त्रिपुरा में 5.70 प्रतिशत मत मिले थे. इस बार उसे इन राज्यों क्रमशः 35, 34.2, आठ और 47.8 प्रतिशत मत मिले हैं.

इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना जैसे अन्य ग़ैर-पूर्वोत्तर राज्यों में भी नरेंद्र मोदी सबसे लोकप्रिय नेता साबित हुए हैं. दिल्ली में पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा ने सातों लोकसभा सीटों पर कब्जा किया है. फ़र्क़ यह है इस बार उसका वोट शेयर 46.40 प्रतिशत से बढ़ कर 56.6 प्रतिशत हो गया है. हरियाणा में उसने कांग्रेस (1) और आईएनएलडी (2) की बची-खुची सीटें भी छीन ली हैं. अब यहां सभी लोकसभा सीटों पर उसका क़ब्ज़ा है. वोट शेयरिंग की बात करें तो पिछली बार भाजपा को यहां 34.70 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार बढ़ कर 57.9 प्रतिशत हो गये हैं. हिमाचल में भाजपा ने पिछली बार सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस बार भी वह ऐसा ही प्रदर्शन कर रही है. यहां उसका वोट प्रतिशत 53.31 प्रतिशत से बढ़ कर 69 प्रतिशत हो गया है.

वहीं, ओडिशा में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीद के मुताबिक़ ही कमाल किया है. विधानसभा चुनाव में वह भले ही बीजेडी से हार गई हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन अभूतपूर्व है. यहां 2014 में जीती एक सीट से बढ़ कर वह आठ पर पहुंच गई है. साथ ही, उसका वोट प्रतिशत भी 21.50 से बढ़कर 38.2 प्रतिशत हो गया है. इसी तरह तेलंगाना में भी भाजपा 2014 में 8.50 प्रतिशत वोट शेयर के साथ केवल एक सीट जीतने में कामयाब रही थी. इस बार उसे राज्य में 19 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिले हैं और वह 17 में से चार सीटें जीतने में भी कामयाब हुई है.