प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर प्रोफाइल से ‘चौकीदार’ शब्द हटा लिया है. एक ट्वीट के जरिये उन्होंने इस बारे में जानकारी दी है. इसी ट्वीट से नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा है, ‘अब वक्त आ गया है कि चौकीदार की भावना को अगले स्तर तक ले जाया जाए. इस भावना को हर क्षण जिंदा रखते हुए हम भारत की प्रगति के लिए निरंतर काम करते रहेंगे.’ इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने आगे लिखा है, ‘चौकीदार शब्द सिर्फ ट्विटर पर मेरे नाम के आगे से हटा है लेकिन यह शब्द मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहेगा.’ इसी ट्वीट के जरिये नरेंद्र मोदी ने अपने समर्थकों से भी इस शब्द को हटाने का आग्रह किया है.

इससे पहले इसी साल 16 मार्च को नरेंद्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान की शुरुआत की थी. इस अभियान को शुरू करने के मौके पर उन्होंने देश के विकास में भागीदारी निभाने वाले हर व्यक्ति को ‘चौकीदार’ बताया था. इसके बाद उन्होंने अगले दिन यानी 17 मार्च को अपने ट्विटर प्रोफाइल पर अपने नाम के आगे ‘चौकीदार’ शब्द जोड़ा था. वैसे आम तौर पर यही माना जाता है कि ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान को शुरू करने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने नाम के आगे चौकीदार शब्द जोड़ने का ट्रेंड भी शुरू किया था, लेकिन वास्तविकता इससे इतर है.

दरअसल इस अभियान की शुरुआत के बाद 17 मार्च को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने एक ट्वीट किया था. उसमें उन्होंने लिखा था, ‘मैं अपना ट्विटर नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और #MainBhiChowkidar अभियान के समर्थन में बदल रहा हूं. क्या आप भी बदलेंगे?’ उस ट्वीट में उन्होंने नरेंद्र मोदी को भी टैग किया था. इसके बाद प्रधानमंत्री ने भी अपने ट्विटर प्रोफाइल पर अपना नाम बदलकर ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी’ कर लिया था.

लोकसभा के इस चुनाव के दौरान ‘चौकीदार’ शब्द काफी चर्चित रहा है. माना जाता है कि भाजपा ने ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ नारे के पलटवार के तौर पर की थी.

उधर, इस अभियान की शुरुआत के बाद कुछ ऐसे सवाल भी उठे थे कि भाजपा ने इसे ट्विटर तक ही क्यों सीमित रखा. ट्विटर पर नाम बदलने का ट्रेंड फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शुरू क्यों नहीं किया गया. तब उस पर अलग-अलग विचार सामने आए थे.

कुछ लोगों की राय थी कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने ट्विटर के ​जरिये अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ऐसा किया है. उसी समय ट्विटर ने दक्षिणपंथी विचारधारा वाले कई यूजर्स के अकाउंट सस्पेंड किए थे और माना जाता है कि इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह अभियान शुरू करने की यह भी एक वजह थी. वहीं यह भी माना गया था कि फेसबुक पर भाजपा के पहले से ही बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं इसलिए वहां उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है.

इसके अलावा एक तकनीकी कारण यह भी बताया गया था कि ट्विटर पर कोई यूजर जब चाहे तब अपने प्रोफाइल नाम को बदल सकता है, जबकि फेसबुक पर यह सुविधा मौजूद नहीं है. सोशल मीडिया के इस प्लेटफॉर्म पर किसी यूजर का नाम दो से तीन बार ही बदला जा सकता है. साथ ही ऐसा करने के लिए उसे अपने व्यक्तिगत परिचय का सबूत भी देना पड़ता है. इसके अलावा एक बार नाम बदलने के बाद फेसबुक यूजर कम से कम 60 दिन तक अपने नाम में बदलाव नहीं कर सकता. इसके अलावा बार-बार ऐसा करने वाले यूजर के अकाउंट को फेसबुक सस्पेंड भी कर देता है.

उधर, ट्विटर पर नाम बदलने वाले उस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए राजनीति के जानकारों ने उसके लोकसभा चुनाव तक ही सीमित रहने का अनुमान जताया था. ऐसे में चुनाव नतीजे वाले दिन ही प्रधानमंत्री ने अपने नाम के आगे से ‘चौकीदार’ शब्द हटाकर राजनीति के पंडितों के उस अनुमान को सही साबित भी कर दिया है.