लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में भी भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने धमाकेदार प्रदर्शन किया है. बिहार की 40 में से 39 लोकसभा सीटें एनडीए के खाते में गई हैं. वहीं सिर्फ एक सीट किशनगंज विपक्ष यानी कांग्रेस को मिली है. चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है बिहार में कुल करीब 57 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें महिला और पुरुष भागीदारी देखें तो एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आता है. राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा सक्रिय माने-जाने वाले इस राज्य में 59.92 फीसदी महिलाओं ने मतदान में हिस्सा लिया था जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 55.26 फीसदी रहा.

वे लोकसभा क्षेत्र जहां पर वोट डालने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा रहा, उनमें कटिहार (72.37), सुपौल (71.64), किशनगंज (70.37), अररिया (69.39) पूर्णिया (68.15), बेगूसराय (67.13), समस्तीपुर (66.74), वैशाली (66.62) और उजियारपुर (65.12) शामिल हैं. दूसरी तरफ राज्य की 40 में से किसी भी सीट पर पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 65 फीसदी पर नहीं पहुंचा. सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया ही ऐसी सीटें रहीं जहां पर 60 फीसदी से अधिक पुरुषों ने मतदान किया.

कुछ लोकसभा सीटों पर स्त्री-पुरुष मतदाताओं के प्रतिशत में बड़ा अंतर भी देखने को मिलता है. उदाहरण के लिए सीतामढ़ी में जहां 54.36 फीसदी पुरुषों ने मतदान में हिस्सा लिया था, वहीं 64.36 फीसदी महिलाएं वोट डालने पहुंचीं. इसी तरह मधुबनी में 48.14 फीसदी पुरुषों पर 59.97 फीसदी महिलाएं और झंझरपुर में 51.25 फीसदी पुरुषों पर 63.83 फीसदी महिलाओं ने अपना वोट दिया था.

कुछ सीटों पर गौर करें तो यह कहा जा सकता है कि उम्मीदवारों के महिला या पुरुष होने का महिलाओं के वोट प्रतिशत पर कोई खास असर नहीं पड़ा. जिन क्षेत्रों में महिलाओं ने मतदान में सबसे ज्यादा हिस्सा लिया उनमें से केवल सुपौल और वैशाली में ही मजबूत उम्मीदवारों में महिलाएं शामिल थीं. सुपौल से कांग्रेस की वर्तमान सांसद रंजीता रंजन और वैशाली से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की वीना देवी चुनाव मैदान में थीं. ऐसा ही एक और उदाहरण सीवान है जहां पर दो महिलाओं - जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से कविता सिंह और राजद से हीना शहाब के बीच मुख्य भिड़ंत थी. सीवान में 50 फीसदी पुरुषों पर करीब 59.56 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला था.

लेकिन अगर पाटलिपुत्र की बात करें, जहां से लालू यादव की बेटी मीसा भारती चुनाव लड़ रही थीं, वहां पर 59 फीसदी पुरुषों की तुलना में केवल 52 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इसी तरह सासाराम से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार चुनाव मैदान में उतरीं थीं और यहां भी केवल 51.65 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 56.88 फीसदी रहा. इसके अलावा नालंदा, आरा, जहांनाबाद, गया, करकट और बक्सर जैसी सीटों पर महिलाओं का मत प्रतिशत पुरुषों की तुलना में कम लेकिन 40 प्रतिशत से ज्यादा ही रहा है. यानी यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि बिहार का प्रतिनिधित्व कौन करेगा इसका फैसला पुरुषों के बजाय महिलाओं ने सुनाया है.