लोकसभा के इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमेठी संसदीय सीट पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने इस सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 वोटों के अंतर से हराया है. स्मृति ईरानी की यह जीत ऐतिहासिक है क्योंकि 1967 में हुए चौथी लोकसभा के चुनाव के बाद यह तीसरा ऐसा मौका है जब कांग्रेस को अपने गढ़ कहलाने वाले अमेठी में हार का स्वाद चखना पड़ा है. इससे पहले 1977 में आपातकाल के बाद हुए चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे और कांग्रेस के नेता संजय गांधी को यहां से हार का सामना करना पड़ा था. तब उन्हें जनता पार्टी के रवींद्र प्रताप सिंह ने हराया था.

हालांकि उसके बाद 1980 में हुए चुनाव में संजय गांधी ने दोबारा इस संसदीय सीट पर कब्जा कर लिया था. फिर उनके आकस्मिक निधन के बाद 1981 में कांग्रेस की तरफ से राजीव गांधी ने इस सीट से चुनाव लड़ा था. तब उन्हें यहां से जीत मिली थी. वे 1991 तक इस सीट से सांसद रहे थे. वर्ष 1991 में उनकी हत्या के बाद कांग्रेस ने कैप्टन सतीश शर्मा को इस सीट से प्रत्याशी बनाया था. उस चुनाव के अलावा 1996 के चुनाव में भी उन्होंने इस सीट से जीत का स्वाद चखा था. लेकिन 1998 में हुए चुनाव के दौरान सतीश शर्मा को भाजपा के संजय सिन्हा ने शिकस्त दी थी.

हालांकि संजय सिन्हा अमेठी से बहुत ज्यादा समय तक के लिए सांसद नहीं रह सके थे. चंद महीनों में सरकार गिर जाने के बाद 1999 में हुए चुनाव में कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने इस सीट से नामांकन दखिल किया था. तब उन्हें यहां से जीत मिली थी. वे अमेठी से 2004 तक सांसद रहीं. साल 2004 में राहुल गांधी ने इस सीट से चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की थी. इसके बाद 2009 और 2014 के आम चुनाव में भी राहुल गांधी ने इसी सीट से संसद का सफर तय किया था.

इधर, लोकसभा के इस चुनाव में राहुल गांधी ने अमेठी के साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ा था. तब यह अटकलें भी लगी थीं कि चुनावी नतीजे आने के बाद राहुल गांधी आखिर किस सीट को छोड़ेंगे? लेकिन लोकसभा के इस चुनाव में राहुल गांधी के लिए अमेठी और वायनाड में से किसी एक सीट को चुनने की स्थिति नहीं बन पाई.

इस दौरान अमेठी से राहुल गांधी की हार को देखते हुए कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू के राजनीतिक करियर को लेकर भी तंज कसे जाने लगे हैं. दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान रायबरेली में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार जाएंगे तो वे राजनीति छोड़ देंगे. जाहिर है कि तब अमेठी को कांग्रेस के गढ़ के तौर पर देखते हुए सिद्धू राहुल गांधी की जीत को लेकर आश्वस्त रहे होंगे. लेकिन अब देखने की बात यह होगी कि अपने बयानों और जुमलों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले सिद्धू राजनीति से संन्यास लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आते हैं या नहीं.