राहुल गांधी का उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से हारना शायद इस चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस के लिए दूसरा सबसे बड़ा झटका है. केंद्रीय मंत्री व भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने उन्हें 50,000 से ज्यादा मतों के अंतर से मात दी है. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी इस जीत के पीछे अमेठी की जनता का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिल सकी, जो उनके दिवंगत पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलती थी.

अमेठी के लोगों का कहना है कि राजीव गांधी के समय शुरू की गई कई परियोजनाएं और कार्यक्रम राहुल के सांसद रहते एक-एक कर बंद हो गए. इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा. उनके मुताबिक इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के लिए अमेठी से पलायन करना पड़ा. राहुल गांधी से केवल अमेठी के युवा ही दूर महसूस नहीं करते, बल्कि गांधी परिवार से बरसों से पूरी निष्ठा से जुड़े बुजुर्गों का भी मन टूटा दिखता है. रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें मलाल है कि गांधी परिवार की वर्तमान पीढ़ी से उन्हें वह प्यार और इज्जत नहीं मिली, जो इसे पहले की पीढ़ियों से मिला करती थी.

समाचार एजेंसी से बातचीत में एक शिक्षक सुनील सिंह कहते हैं, ‘राजीव गांधी के समय जीवन रेखा एक्सप्रेस साल में एक बार महीने भर के लिए अमेठी आती थी. इस ट्रेन पर डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम होती थी, जो उपचार के साथ-साथ सर्जरी भी करती थी. इस सेवा से लाखों लोगों को फायदा हुआ. लेकिन यह सेवा राहुल के सांसद रहते बंद हो गई और इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा को बहाल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया.’

सुनील सिंह की बात से सहमति जताते हुए किराना व्यापारी शशांक साहू ने बताया, ‘राजीव गांधी ने ‘सम्राट बाइसिकिल्स’ नामक कंपनी स्थापित करने में मदद की थी. फैक्ट्री घाटे में चली गई और उसे बंद कर दिया गया. उसके बाद कंपनी की जमीन नीलामी पर लग गई, क्योंकि कंपनी पर कर्ज था. जमीन को राजीव गांधी चैरिटेबिल ट्रस्ट ने खरीद लिया.’ साहू ने आगे कहा, ‘इस ट्रस्ट में राहुल गांधी ट्रस्टी हैं और किसानों को जमीन लौटाने की मांग को लेकर स्मृति ईरानी ने पांच साल तक लड़ाई लड़ी. स्मृति के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय लोगों से किसानों की जमीन वापस लौटाने का वादा किया है.’

वहीं, आंगनबाड़ी सेविका उषा तिवारी ने बताया कि राजीव गांधी सचल स्वास्थ्य सेवा के तहत नौ गाड़ियां गांव-गांव जाकर गरीबों का इलाज करती थीं और मुफ्त में दवा बांटती थीं. लेकिन यह सेवा भी राहुल के सांसद रहते ही बंद हो गई और जनता की भारी मांग के बावजूद इसे पुन: शुरू कराने का प्रयास नहीं किया गया. इस लोकसभा क्षेत्र के एक और बुजुर्ग निवासी शमशुद्दीन ने बताया, ‘राजीव गांधी गांव-गांव घर-घर जाकर, एक-एक व्यक्ति से व्यक्तिगत तौर पर मिलते थे और इससे उनका अमेठी की जनता के साथ आत्मीय संबंध कायम हो गया था. राहुल ने अमेठी के दौरे तो बहुत किए लेकिन, कहीं न कहीं लोगों के साथ वह सीधा संवाद नहीं स्थापित कर पाए, जो राजीव गांधी के साथ होता था.’

शमशुद्दीन के मुताबिक राजीव गांधी के समय के पुराने और निष्ठावान कांग्रेसी धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते चले गए. उन्होंने कहा, ‘ये लोग ही पार्टी के चुनाव अभियान की पूरी कमान संभालते थे. अगर ये लोग साथ होते तो शायद नतीजे राहुल के पक्ष में नजर आते.’

इसके अलावा अमेठी के गौरीगंज सब्जी मंडी में सब्जी का थोक कारोबार करने वाले धनंजय कुमार मौर्य ने बताया, ‘अमेठी से सांसद रह चुके कैप्टन सतीश शर्मा के समय बनी मालविका स्टील फैक्ट्री भी राहुल के ही समय में बंद हो गई. किसानों की तो गई ही, साथ ही दस हजार लोग बेरोजगार हो गए. ये वही बेरोजगार थे, जिन्हें किसानों से जमीन के बदले एक परिवार से एक व्यक्ति को फैक्ट्री में रोजगार के लिए रखा गया था.’