लोकसभा चुनाव में भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बड़ी जीत हासिल की है. भाजपा ने लगातार दूसरी बार न केवल अकेले बहुमत हासिल किया बल्कि पिछली बार के मुकाबले अपनी सीटों की संख्या में भी इजाफा किया. इस बार पार्टी ने 300 का आंकड़ा पार कर लिया है. उधर, कांग्रेस केवल 52 सीटों पर सिमट गई है. यानी इस बार भी देश की सबसे पुरानी पार्टी लोकसभा में विपक्ष का दर्जा हासिल करने से दूर है. 16वीं लोकसभा (2014-19) में भी उसे यह मान्यता हासिल नहीं हुई थी. संसद के निचले सदन में विपक्ष का दर्जा हासिल करने के लिए कम से कम 10 फीसदी यानी 55 सीटें हासिल करना अनिवार्य होता है.

देश के प्रमुख अखबारों ने इस चुनावी नतीजे की अपनी-अपनी तरह से व्याख्या की है. हिंदी और अंग्रेजी के अधिकांश अखबारों ने इस जीत का श्रेय नरेंद्र मोदी को दिया है. उनका यह भी कहना है कि इस जीत में मोदी सरकार को लेकर जनता का विश्वास और उम्मीद भी शामिल है. वहीं, कांग्रेस की करारी हार को लेकर गांधी परिवार को कठघरे में खड़ा किया गया है. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस की पारंपरिक सीट अमेठी को भी नहीं बचा पाए. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश की चुनावी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा केवल सोनिया गांधी की सीट रायबरेली बचाने में कामयाब हो पाईं.

अपने राजनीतिक खांचों से बाहर नहीं निकल पाना विपक्ष की हार का कारण : अमर उजाला

अमर उजाला ने अपने संपादकीय में भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की जीत की बड़ी वजह जनता का भरोसा बताया है. वहीं, अपने राजनीतिक खांचों से बाहर नहीं निकल पाने को उसने विपक्ष की बड़ी हार का कारण माना है. अखबार का मानना है कि एनडीए की इस जीत के पीछे नरेंद्र मोदी का करिश्मा ह, जिन्होंने नोटबंदी और जीएसटी जैसे साहसिक फैसले लिए और साथ ही सीमा पार आतंकी शिविरों पर एयर स्ट्राइक को मंजूरी दी. अमर उजाला ने भाजपा की इस जीत में केंद्रीय योजनाओं की भी अहम भूमिका मानी है. अखबार ने मोदी सरकार की आगे की चुनौतियों का भी जिक्र किया है. इनमें रोजगार के मौके पैदा करना, अर्थव्यवस्था को गति देना, शहरीकरण में तेजी लाना और निवेशकों का भरोसा जीतना शामिल है.

यह ‘नया भारत’ है, जहां प्रधानमंत्री भाजपा सहित सभी दलों से ऊपर हैं : द टेलिग्राफ

कोलकाता से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ ने लिखा है कि इस चुनाव में विपक्ष ने कृषि संकट, आर्थिक मोर्चे पर सुस्ती, रोजगार और भयावह बहुसंख्यकवाद को मुद्दा बनाया था, लेकिन मतदाताओं ने इन मुद्दों को खारिज कर दिया. अखबार ने भाजपा की इस जीत के पीछे कई कारण बताए हैं. इनमें मजबूत सरकार का आश्वासन, गैर-भाजपा सरकार के स्थायित्व को लेकर आशंकाएं, मतदाताओं का ध्रुवीकरण और भाजपा के चुनावी तंत्र की ताकत शामिल है. अखबार ने लिखा है कि पार्टी इस लोकसभा चुनाव को एक बार फिर व्यक्ति केंद्रित बनाने में सफल रही है. द टेलिग्राफ ने चुनाव परिणाम के अपने विश्लेषण में यह भी कहा है कि यह ‘नया भारत’ है जहां प्रधानमंत्री सभी दलों से ऊपर हैं, यहां तक कि अपनी पार्टी से भी.

भाजपा ने विपक्ष के वोट बैंक को तोड़ने के साथ गरीबों को भी अपनी ओर खींचने में सफल रही : द इंडियन एक्सप्रेस

द इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी को नई जगहों के साथ-साथ समूहों में भी ले गए. अखबार लिखता है कि भाजपा को अब तक ब्राह्मण और बनिया वर्ग की पार्टी माना जाता था, लेकिन अब उसकी पहुंच अन्य तबकों तक हो चुकी है. उसके मुताबिक यह नतीजा बताता है कि भाजपा ने न केवल विपक्ष के वोट बैंक को तोड़ दिया है बल्कि, गरीबों को भी वह अपनी ओर खींचने में सफल रहा है. अखबार आगे लिखता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने यह प्रवृत्ति दिखाई है कि यदि वह सरकार में भी है तो भी इससे उसकी सत्ता हासिल करने की भूख कम नहीं होती. द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बात को भी दर्ज किया है कि पार्टी लगातार जनता तक पहुंचने वाले संदेशों पर नई-नई परतें जोड़कर एक नया मुखौटा दिखाती रही है. उदाहरण के लिए, पुलवामा आतंकी हमले के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया गया और इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और फिर ‘बाहुबली राष्ट्रवाद’ का रूप दिया गया. अखबार ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों की विफलता और इसकी वजह का जिक्र नहीं किया है.

क्या यह गांधी परिवार से आगे देखने का समय है? : हिंदुस्तान टाइम्स

हिंदुस्तान टाइम्स ने देश की दोनों प्रमुख पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस के लिए एक-एक सवाल खड़ा किया है. अखबार ने कांग्रेस से सवाल किया है कि क्या यह गांधी परिवार से आगे देखने का समय है? उसके मुताबिक लोकसभा चुनाव में तीन गांधी मिलकर भी पार्टी को न तो जीत दिला सके और न ही साल 2014 के मुकाबले इस बार प्रदर्शन में कोई खास सुधार ही हुआ. अखबार लिखता है कि दूसरी तरफ कांग्रेस से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी और वाईएसआर जगनमोहन रेड्डी ने अपनी-अपनी पार्टी के लिए अच्छा काम किया. फिलहाल, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ही अकेले शख्स हैं, जिन्होंने पार्टी के भीतर अपने लिए जगह बनाने में सफलता हासिल की है, लेकिन वे ऐसा करने वाले कुछ गिने-चुने नेताओं में से ही एक हैं. अखबार का मानना है कि पार्टी को इस मसले पर अब गंभीरता से खुद का निरीक्षण करना चाहिए.

इसके अलावा हिंदुस्तान टाइम्स ने भाजपा से यह सवाल किया है कि वह शासन और प्रशासन के संदर्भ में क्या कर सकती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों ने अपने जनप्रतिनिधि चुने हैं, प्रधानमंत्री नहीं. हिंदुस्तान टाइम्स का आगे मानना है कि इस चुनाव को सिर्फ एक व्यक्ति पर केंद्रित कर देना पार्टी की काबिलियत थी, लेकिन इसकी आड़ लेकर कृषि संकट और बेरोजगारी जैसे बहुत जरूरी मुद्दों को मतदाताओं की नजर से ओझल कर दिया गया.

देश का मानस बदल रहा है : दैनिक जागरण

दैनिक जागरण ने एनडीए की जीत का श्रेय मोदी सरकार के कामकाज को दिया है. साथ ही, अखबार का कहना है कि मतदाताओं के विश्वास की बदौलत नरेंद्र मोदी ने सत्ता विरोधी रूझान को मात दे दी है. अखबार भाजपा की इस बड़ी जीत में उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की अहम भूमिका पर जोर देता है. साथ ही, वह लिखता है कि इस जीत की बड़ी वजह गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में साल 2014 के प्रदर्शन को दोहराना भी शामिल है. इसके अलावा दैनिक जागरण की मानें तो जातिवादी राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार में महागठबंधन की हार बताती है कि देश का मानस बदल रहा है.