नोटा दबाने के मामले में बिहार सबसे आगे रहा है. देश में सबसे ज्यादा बिहार की जनता ने नोटा का बटन दबाकर अपने उम्मीदवारों को खारिज किया है. बिहार में कुल 8.17 लाख मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया है.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर हुए मतदान में दो फीसदी लोगों ने नोटा का चयन किया है. इसमें गोपालगंज संसदीय सीट पर सबसे ज्यादा 51,660 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. यहां कुल 5.04 फीसदी मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया है, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके बाद बिहार के पश्चिम चंपारण में 4.51 फीसदी, नवादा 3.73 फीसदी और जहानाबाद संसदीय सीट पर 3.37 फीसदी मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया है.

बिहार के बाद नोटा का बटन दबाने के मामले में दमन और दीव आता है, यहां 1.70 फीसदी लोगों ने नोटा का बटन दबाया है. इसके बाद आंध्र प्रदेश 1.49 फीसदी और छत्तीसगढ़ 1.44 फीसदी का नंबर आता है.

भारत में उम्मीदवारों की सूची में नोटा को 2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शामिल किया गया था. इससे मतदाताओं को एक ऐसा विकल्प मिला कि अगर वह अपने क्षेत्र के किसी उम्मीदवार को पसंद नहीं करते हैं तो वह अपना मतदान नोटा पर कर सकते हैं. इसके बाद 16वीं लोकसभा के चुनाव में 2014 में पहली बार संसदीय चुनाव में नोटा की शुरुआत हुई. इसमें करीब 60 लाख मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुना. यह लोकसभा चुनाव में हुए कुल मतदान का 1.1 फीसदी था.