लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस मौके पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा. साथ ही कहा, ‘ऐसे दौर में जब लोकतंत्र पैसे के बल पर चलता हो तो किसी राज्य के मुख्यमंत्री के लिए काम करना बेहद कठिन है.’ इसके आगे उनका कहना था, ‘शनिवार को ही पार्टी की बैठक में मैंने मुख्यमंत्री का पद छोड़ने की पेशकश की थी. साथ ही सिर्फ पार्टी अध्यक्ष के तौर पर सेवा करने की इच्छा जताई थी. लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया.’

ममता बनर्जी ने आगे कहा, ‘बीते पांच-छह महीनों के दौरान चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल की सरकार को निशाना बनाया गया. आपातकाल जैसी स्थिति पैदा की गई. इस दौरान हमारी सरकार को सही तरह से काम करने की अनुमति भी नहीं दी गई. ऐसा चुनाव आयोग पर भाजपा के नियंत्रण की वजह से हुआ.’ ममता बनर्जी के मुताबिक, ‘राज्य में चुनाव के दौरान हिंसा में हिंदू-मुसलमान में भेदभाव पैदा करवाकर वोटों का बंटवारा कराया गया.’ उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्रीय बलों ने भी इस दौरान लोगों को डरा-धमकाकर भाजपा के पक्ष वोट डलवाने का काम किया.

इसके साथ ही सवालिया लहजे में उनका कहना था, ‘कैसे भगवा पार्टी राजस्थान, गुजरात और दिल्ली की सभी सीटें जीतने में कामयाब हो गई. अगर वोटों की लूट न हुई हो तो भला यह मुमकिन हो सकता था. लोग भले ही यह बात न कह पाएं. लेकिन मुझे ऐसा कहने में कोई डर नहीं लगता.’ इस मौके पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता से अपील करते हुए कहा कि अगर वहां के लोग उनके हाथ मजबूत करेंगे तभी वे मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी ठीक से सेवा कर पाएंगी.

उधर, इसी गुरुवार और शुक्रवार घोषित लोकसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को 543 में से 303 संसदीय सीटों पर जीत हासिल हुई थी. अब तक के चुनाव में भाजपा के लिए यह सबसे बड़ी जीत भी बनी है. भाजपा की इन सीटों में पश्चिम बंगाल की 19 संसदीय सीटें भी शामिल हैं. वहीं 2014 के आम चुनाव से यदि इसकी तुलना करें तो उस समय भाजपा को पश्चिम बंगाल में सिर्फ दो सीटें ही मिली थीं.