दिल्ली में राजनाथ सिंह के करीबी बड़े बेचैन हैं. उनके पास खबरें आ रही है कि नरेंद्र मोदी जब शपथ लेंगे तो हो सकता है राजनाथ सिंह की शपथ ना हो. चुनाव से पहले तक यह तय माना जा रहा था अगर मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे तो गृह मंत्री की कुर्सी राजनाथ सिंह के पास होगी. लेकिन अब भाजपा के कुछ बड़े नेता अचानक राजनाथ सिंह और उनके नजदीकी लोगों से मिलने लगे हैं.

सुनी-सुनाई है कि दो बार संगठन से जुड़े संघ प्रचारक भी राजनाथ सिंह से मिले हैं. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी राजनाथ सिंह का मिजाज़ भांपने की कोशिश कर रहा है. अदरखाने उनके पास यह बात पहुंचाई गई है कि अगर वे गृह मंत्री बनने का मोह छोड़ दें तो उनके बेटे पंकज सिंह को योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है.
बताया जाता है कि जितने भी लोग राजनाथ सिंह के पास इस तरह का संदेश लेकर आए उन सभी को एक ही जवाब मिला - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो भी तय करेंगे वह मुझे मंजूर होगा. भाजपा कार्यालय में मौजूद एक अहम सूत्र बताते हैं कि राजनाथ सिंह को लोकसभा स्पीकर बनाने की कोशिश चल रही है. उन्हें मनाया जा रहा है कि वे सदन चलाएं, संवैधानिक पद पर बैठें. अगर राजनाथ सिंह ने जिद नहीं ठानी तो बहुत मुमकिन है कि वे लोकसभा के अगले स्पीकर बन जाएं. अगर ऐसा हो गया तो अमित शाह के लिए गृह मंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा.
अगर राजनाथ सिंह कैबिनेट में बने रहे तो नरेंद्र मोदी के बाद शपथ राजनाथ सिंह की होगी, क्योंकि 2014 में भी ऐसा ही हुआ था. लेकिन अगर वे स्पीकर का पद स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए तो प्रधानमंत्री के बाद अमित शाह को शपथ दिलाई जाएगी. इससे यह साफ हो जाएगा कि भाजपा में नरेंद्र मोदी के बाद नंबर दो की हैसियत अमित शाह की ही है.
जानने वाले बताते हैं कि नरेंद्र मोदी 2019 से आगे की सियासत में जुटे हैं और अमित शाह 2024 से आगे की सियासत पर नज़र बनाए हुए हैं. भाजपा में 75 साल की उम्र की सीमा मोदी-शाह की जोड़ी ने ही तय की थी. अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र 68 साल है और अमित शाह सिर्फ 54 साल के ही हैं. 2024 में प्रधानमंत्री मोदी 73 साल के हो जाएंगे और अमित शाह 59 साल के होंगे. इस लिहाज़ से भी भाजपा के अंदर यह चर्चा शुरू हो गई है कि नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा में प्रधानमंत्री की कुर्सी का दावेदार कौन होगा?
पिछले दो हफ्तों में जो दिखा वह बताता है कि अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा हर कदम पर यह दिखाना चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अमित शाह ही पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता हैं. उदाहरण के तौर पर 23 मई को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा कार्यालय पहुंचे तो राजनाथ सिंह समेत बाकी नेता मंच पर पहले से बैठे थे और अमित शाह की एंट्री प्रधानमंत्री के साथ हुई. जब अमित शाह दफ्तर पहुंचे तो उन पर पुष्पवर्षा की गई. भाजपा में यह धारणा है कि जब प्रधानमंत्री मंच पर होते हैं तो बाकी नेता लंबा भाषण देने से बचते हैं. ऐसा चुनावी रैलियों में भी होता है और पार्टी के कार्यक्रमों में भी. लेकिन 23 मई को मोदी मंच पर थे और अमित शाह उनसे पहले काफी देर तक बोले. उनके अलावा राजनाथ सिंह सहित बाकी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया गया.
इसके बाद अहमदाबाद भी अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गए. गुजरात अमित शाह का अपना गृह राज्य है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं थी. लेकिन जब प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र वराणसी पहुंचे तब भी अमित शाह साथ थे और मोदी से पहले अमित शाह को ही बोलने का मौका मिला. राजनाथ सिंह जैसे उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता यहां कहीं नहीं दिखे. प्रधानमंत्री ने संसद के सेंट्रल हॉल में कहा था कि मंत्री बनाने की चर्चा बहुत हो रही है. लेकिन लिस्ट अभी तैयार नहीं हुई है. लेकिन उसी सेंट्रल हॉल से निकले भाजपा सांसदों से जब पत्रकारों ने पूछा कि मंत्री बनने का फैसला क्या सिर्फ प्रधानमंत्री करेंगे तो पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के सांसदों ने साफ-साफ कहा कि अमित शाह से जरूर सलाह ली जाएगी.
2014 में अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी से भी मंत्रिमंडल बनाते वक्त चर्चा की गई थी. राजनाथ सिंह के एक बेहद करीबी भाजपा नेता बताते हैं कि पिछले पांच साल में उनकी ताकत लगातार घटती गई है. पहले संघ के नेता भी राजनाथ सिंह को बेहद पसंद करते थे. लेकिन अब संघ से भी वैसा पुराना संबंध नहीं रहा है. मोहन भागवत सरकार के काम में दखल नहीं देना चाहते. ऐसे में अगर राजनाथ सिंह को लोकसभा स्पीकर बनाने का फैसला हो गया तो उनके पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई और चारा नहीं होगा.
अब राजनाथ सिंह उस बैठक का इंतजार कर रहे हैं जिसमें वे प्रधानमंत्री के साथ विचार-विमर्थ करेंगे, लेकिन ऐसा होता फिलहाल नहीं दिखता. पार्टी के अंदर की खबर रखने वाले एक सूत्र बताते हैं कि अरुण जेटली बीमार हैं, नितिन गडकरी पुराना मंत्रालय ही चाहते हैं. सुषमा स्वराज चुनाव ही नहीं लड़ीं तो ऐसी सूरत में मोदी सरकार के सबसे अनुभवी मंत्रियों में राजनाथ सिंह ही हैं जो फिट भी हैं और अविवादित भी. अगर राजनाथ सिंह कैबिनेट में न होकर स्पीकर के दफ्तर पहुंच गए तो अमित शाह के लिए कोई कंपटीशन नहीं रहेगा.
एक अनुभवी पत्रकार जो नरेंद्र मोदी को बरसों से जानते हैं, कहते हैं, ‘इस बार नरेंद्र मोदी की कैबिनेट एकदम अलग तरह से बनेगी. बड़े-बड़े नाम गायब हो जाएंगे. जिनकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, या जिनका मंत्री बनना तय माना जा रहा है उनका नाम नहीं दिखेगा. लिस्ट में राजनाथ सिंह कन्फर्म हैं या नहीं, यह सबसे बड़ा सस्पेंस है. और इसमें अमित शाह का नाम कहां है, यह भी.
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