सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के हापुड़ लिंचिंग केस की फिर जांच का निर्देश देने से मंगलवार को साफ इंकार कर दिया. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच अवकाशकालीन बेंच ने कहा कि इस बारे में जो भी करना होगा वह निचली अदालत ही तय करेगी.

शीर्ष अदालत हापुड़ की घटना में मारे गए क़ासिम क़ुरैशी के रिश्तेदार समीउद्दीन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उन्हाेंने इसमें दलील थी कि क़ासिम के दो भाईयों ने सीआरपीसी (अपराध प्रक्रिया संहिता) की धारा-164 के तहत सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) हापुड़ के सामने बयान दर्ज़ कराए हैं. इन बयानों में जो ख़ुलासे हुए हैं उनके आधार पर इस मामले की और जांच कराए जाने की ज़रूरत है. लिहाज़ा उत्तर प्रदेश सरकार को इस बाबत आदेश जारी किया जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पूरा मामला निचली अदालत पर छोड़ दिया.

शीर्ष अदालत ने समीउद्दीन से कहा कि वे निचली अदालत में अपनी बात रखें. इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने मामले में जांच से जुड़ी ताज़ा स्थिति रिपोर्ट अदालत में दर्ज़ करा दी है. ग़ौरतलब है कि जून-2018 में मांस कारोबारी क़ासिम की हापुड़ में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. गौरक्षा के नाम पर हुई इस हिंसा में एक अन्य व्यक्ति बुरी तरह घायल भी हुआ था. इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने बीते साल ही सितंबर में आईजी (महानिरीक्षक), मेरठ पुलिस की देखरेख में घटना की जांच का आदेश दिया था.