लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार को बड़ी उठा-पटक देखने को मिली. खबरों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो विधायकों सहित 50 से भी ज्यादा पार्षदों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है. भाजपा में शामिल होने वाले टीएमसी के इन विधायकों में भाजपा नेता मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय के अलावा तुषारक्रांति भट्टाचार्य शामिल हैं. इनके साथ ही वामपंथी दल सीपीएम के एक विधायक देवेंद्र रॉय ने भी आज भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है.

इस मौके पर भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रमुख कैलाश विजयवर्गीय ने आने वाले दिनों में टीएमसी के कई और नेताओं के भाजपा में शामिल होने की तरफ इशारा किया. साथ ही कहा, ‘लोकसभा के चुनाव सात चरणों में संपन्न हुए थे. टीएमसी के नेताओं का भाजपा में शामिल होने का यह पहला चरण है.’ वहीं मुकुल रॉय ने कहा, ‘आज बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल की तीन नगरपालिका के कई सदस्य भाजपा में शामिल हुए हैं. इनमें से 17 पार्षद कंचरापाड़ा नगरपालिका के हैं. काचरापाड़ा के पार्षदों और वहां के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के भाजपा में आने से अब इस नगरपालिका पर हमारी पार्टी का कब्जा हो गया है.’

इधर, बड़ी संख्या में टीएमसी नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों दलों के बीच आपसी तनाव के बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनाव के बाद टीएमसी नेताओं के पार्टी छोड़ने की तरफ इशारा किया था. तब एक रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेतावनी देते हुए उन्होंने टीएमसी के 40 विधायकों के अपने संपर्क में होने की बात कही थी. साथ ही कहा था, ‘23 मई को जब पश्चिम बंगाल में कमल खिलेगा तो दीदी (ममता बनर्जी) के विधायक उन्हें छोड़कर जाना शुरू कर देंगे.’ लोकसभा के इस चुनाव में भाजपा को इस राज्य की कुल 42 में से 18 सीटें जीतने में कामयाबी मिली है.