क्रिकेट विश्व कप शुरू हो चुका है. खेल का यह महाकुंभ लोकप्रियता और व्यावसायिक लिहाज से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का सबसे मेगा इवेंट होता है. हर विश्व कप में आईसीसी की कोशिश होती है कि क्रिकेट की लोकप्रियता को और बढ़ाया जाए. वैसे तो यह कोशिश हर समय होती है, लेकिन विश्व कप के समय यह परवान पर होती है.

हालांकि इन तमाम कोशिशों के बाद भी क्रिकेट अभी उस मुकाम पर पहुंचने से मीलों दूर दिखता है, जहां फुटबॉल जैसे खेल खड़े हैं. आंकड़ों का सहारा लेकर यह कहा जा सकता है कि क्रिकेट फुटबॉल के बाद सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल है. लेकिन अगर एक विस्तृत फलक पर देखें तो फुटबॉल या फीफा विश्व कप के सामने आईसीसी विश्व कप फीका ही दिखता है.

भारत दुनिया के क्रिकेट की नई शक्तिपीठ है. इसलिए यहां तो क्रिकेट विश्व कप को लेकर उत्साह दिखता है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर निकलते ही तमाम एशिया इसके प्रति उदासीन नजर आता है. इंग्लैंड जैसे क्रिकेट के जन्मदाता देश में क्रिकेट लोकप्रिय है, लेकिन फुटबॉल से ज्यादा नहीं. पिछले कुछ समय से क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ती हुई दिखती है, लेकिन मोटे तौर पर वह राष्टमंडल देशों से बाहर जाती नहीं दिखती.

उधर, फीफा विश्व कप की लोकप्रियता उन देशों में भी दिखती है जो फुटबॉल में कोई खास मकाम नहीं रखते. भारत इनमें शामिल है. कोलकाता या कोच्चि में फीफा विश्व कप के दौरान ब्राजील या अर्जेंटीना के किसी शहर से कम खुमार नहीं दिखता. इस दौरान सोशल मीडिया पर उठने वाली लहरों में भी इस बात को महसूस किया जा सकता है कि फुटबॉल या इसके महाकुंभ की लोकप्रियता दुनिया में कितनी विस्तृत और विविध है.

खेल के जानकार मानते हैं कि फुटबॉल और क्रिकेट की लोकप्रियता में फर्क की एक मूल वजह दोनों खेलों के स्वरूप में है. फुटबॉल अपने स्वरूप में तेज गति का खेल है, जिसमें 90 मिनट में तमाम एक्शन और रोमांच देखने को मिलता है. उधर, क्रिकेट अपने स्वरूप में लंबा और धीमी गति से चलने वाला खेल है. अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उसने अपने फार्मेट बदले, लेकिन उसका सबसे छोटा फार्मेट टी-20 भी वैसा रोमांच नहीं पैदा कर पाता जैसा फुटबॉल में है. क्रिकेट में रोमांच को बढ़ाने के लिए तमाम नियम भी बदले गए. आईपीएल जैसी लीग में रन बनने के बजाय बरसने लगे, लेकिन गेंद और बल्ले में इसने असमानता इतनी बढ़ा दी कि बहुत सारे दर्शकों को यह फिर एकरस लगने लगा है.

क्रिकेट और फुटबॉल दोनों को टीम गेम माना जाता है, लेकिन फुटबॉल की तरह क्रिकेट में ऐसा कभी नहीं होता कि एक ही क्षण में दोनों टीमें एक साथ अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन कर रही हों. अंत में क्रिकेट एक ऐसा खेल बन जाता है, जिसमें नायकत्व की ज्यादा संभावना हमेशा बल्लेबाज की तऱफ झुकी रहती है. उधर, फुटबॉल में एक ही समय में पूरी टीम इकाई की तरह खेलकर दर्शक को रोमांचित करती ही है, लेकिन उसमें कभी भी कोई खिलाड़ी अपनी निजी प्रतिभा के बल पर चमत्कार रच देता है. यानी फुटबॉल हर समय टीम गेम और खिलाड़ी की निजी उत्कृष्टता के साथ समन्वय रचता है जो उसे बाकी खेलों के मुकाबले ज्यादा रोमांचक और लोकप्रिय बनाता है.

क्रिकेट विश्व कप की तुलना अगर फीफा से की जाए तो और भी चीजें सामने आती हैं. मसलन, आईसीसी विश्व कप-2019 में कुल दस टीमें हिस्सा ले रही हैं, जबकि 2018 में हुए फुटबॉल विश्व कप में कुल 32 टीमों ने हिस्सा लिया था. फीफा विश्व कप में 32 टीमें क्वालिफाई करके आई थीं, लेकिन फुटबॉल विश्व कप के क्वालिफायर मुकाबले 210 टीमों के बीच खेले गए थे. 210 टीमों की दौड़ में 32 टीमें अपनी जगह बना सकीं, इससे प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेलने वाली 32 टीमें भी नहीं हैं. यह दोनों टूर्नामेंटों में प्रतिस्पर्धा का स्तर और क्रिकेट की सीमितता बताता है.

दुनिया भर में फुटबॉल लीग की अपनी फॉलोइंग है और उनकी लोकप्रियता और प्रतिद्वंदिता की अपनी कहानी है. लेकिन अगर विश्व कपों की ही तुलना करें तो फुटबॉल विश्व कप आयोजन के लिहाज से भी काफी पुराना है. पहले फुटबॉल विश्व कप का आयोजन 1930 में हुआ, जबकि क्रिकेट की दुनिया में इस तरह की प्रतियोगिता 1975 में शुरु हुई. हालांकि, इसके भी सूत्र फुटबॉल की लोकप्रियता में छिपे हैं. सन् 1930 में शुरु हुए फीफा विश्व कप का आयोजन दुनिया के 17 देश कर चुके हैं, जबकि क्रिकेट विश्व कप की मेजबानी अब तक दस देशों ने की है. जिनमें से कई बार दो या उससे ज्यादा देशों ने संयुक्त रूप से क्रिकेट विश्व कप का आयोजन किया.

खेल जगत में अब टीवी के प्रसारण अधिकार भी कमाई और उस खेल के प्रभुत्व के बारे में एक इशारा करते हैं. 2014 के फुटबॉल विश्व कप के दौरान फीफा के अधिकृत ब्राडकॉस्टर्स 200 थे, जबकि 2015 के क्रिकेट विश्व कप में सिर्फ 40 प्रसारणकर्ताओं ने अधिकार खरीदे थे. 2018 के फुटबॉल विश्व कप के दौरान 3.5 अरब से ज्यादा लोगों ने टीवी पर इसका मजा लिया. उधर, 2015 में क्रिकेट विश्व कप को 1.5 अरब लोगों ने देखा.

यह अंतर तब और बड़ा दिखने लगता है जब इस बात पर गौर किया जाए कि क्रिकेट भारतीय उपमहाद्वीप में खासा लोकप्रिय है और भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे सघन आबादी वाले देश इस दर्शक वर्ग में एक बड़ा हिस्सा रखते हैं. इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2015 के विश्व कप में जिस मैच ने सबसे ज्यादा दर्शक खींचे, वह भारत-पाकिस्तान के बीच का मैच था. इस मैच की व्यूअरशिप करीब एक अरब के आसपास रही थी. यानी अगर भारतीय महाद्वीप के दर्शकों को निकाल दिया जाए तो क्रिकेट देखने वाले दर्शकों का टोटा पड़ता नजर आता है.

इन दोनों खेलों के अर्थशास्त्र में भी भी जमीन आसमान का अंतर है. जानकारों के मुताबिक फीफा, विश्व कप के दौरान आईसीसी से 100 गुना ज्यादा कमाई करती है. इसके अलावा 2018 में फुटबॉल विश्व कप जीतने वाले फ्रांस ने ईनामी राशि के तौर पर 38 मिलियन यानी 3.8 करोड़ डॉलर जीते थे. उधर, 2015 के क्रिकेट विश्व कप विजेता आस्ट्रेलिया को 3.79 मिलियन (करीब 37.9 लाख) डॉलर जीते थे. यानी इस लिहाज से दोनों में करीब दस गुना फासला है.

ईनामी राशि से इतर देखें तो भी फुटबॉल विश्व कप का आयोजन किसी देश के लिए बड़ा अवसर होता है. अगर ब्राजील का उदाहरण लिया जाये तो जिस साल उसने फीफा विश्व कप का आयोजन किया, उस साल देश का पर्यटन बहुत तेजी से बढ़ा. वहां के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार इस आयोजन के दौरान 60 लाख पर्यटकों की आमद दर्ज की गई. बाद में रियो ओलंपिक के दौरान भी पर्यटकों की इतनी आमद नहीं रही थी. फुटबॉल के प्रति दीवानगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अगर स्टेडियम में मैच देखने के लिए सबसे सस्ते टिकटों की कीमत की तुलना की जाए तो फीफा के दौरान ये टिकट औसतन 105 डॉलर के होते हैं और क्रिकेट विश्व कप के दौरान इनकी कीमत 27 डॉलर के आसपास होती है.

इस सबके बावजूद भारत में क्रिकेट फुटबॉल से बहुत आगे है. विश्व कप में इसका रोमांच चरम पर होगा. क्रिकेट में भारत की लोकप्रियता की जड़ें ब्रिटिश राज और स्टार खिलाड़ियों से लेकर विश्व कप की सफलताओं तक कई कारणों में छिपी हैं. लेकिन धीरे-धीरे ही सही भारत में फुटबॉल देखने वाली जमात बढ़ रही है. यूरोपियन लीग को फालो करने वालों की संख्या भी महानगरों में अब ठीक-ठाक हो चली है. उम्मीद की जा सकती है कि धीरे-धीरे यह भारतीय खेल संस्कृति में भी बदलाव लाए, जहां क्रिकेट के साथ बाकी खेलों का भी सहअस्तिव होगा.